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कोई 4 साल के बच्चे की मां तो कोई किसान की बेटी, मिसाल है इन 5 अफसरों के सक्सेस की कहानी
यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) द्वारा संचालित सिविल सर्विसेस एग्जाम, 2017 में कई ऐसे कैंडिडेट सफल हुए जो अलग-अलग बैकग्राउंड से आए थे। इनमें ऐसी भी महिला कैंडिडेट रही हैं जो किसी छोटे बच्चे की मां हैं तो कोई किसान की बेटी। देखा जाए तो हर कैंडिटेट की सफलता की कहानी प्रेरणा देने वाली है। जानते हैं सिविल सर्विसेस एग्जाम में सफल रहे ऐसे ही कुछ कैंडिडेट्स के बारे में।
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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) द्वारा संचालित सिविल सर्विसेस एग्जाम, 2017 में कई ऐसे कैंडिडेट सफल हुए जो अलग-अलग बैकग्राउंड से आए थे। इनमें ऐसी भी महिला कैंडिडेट रही हैं जो किसी छोटे बच्चे की मां हैं तो कोई किसान की बेटी। देखा जाए तो हर कैंडिटेट की सफलता की कहानी प्रेरणा देने वाली है। जानते हैं सिविल सर्विसेस एग्जाम में सफल रहे ऐसे ही कुछ कैंडिडेट्स के बारे में।
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इंडियन रेवेन्यू सर्विस के अधिकारी अनुदीप दूरिसेट्टी ने सिविल सर्विसेस एग्जामिनेशन में टॉप किया। फिलहाल, वे हैदराबाद में असिस्टेंट कमिश्नर (कस्टम्स एंड टायरेक्ट टैक्सेज) के पद पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सांइसेस (बिट्स), पिलानी से इंजीनियरिंग में डिग्री ली। उनके पिता नॉर्दर्न पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड, तेलंगाना में असिस्टेंट डिविजनल इंजीनियर हैं। अनुदीप ने सिविल सर्विसेस एग्जाम में तेलुगु को एक भारतीय भाषा के रूप में लिया था। इंडियन रेवेन्यू सर्विस ज्वाइन करने के पहले वे हैदराबाद में गूगल कंपनी में प्रोडक्ट क्वालिटी एनालिस्ट के रूप में काम कर रहे थे।
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तपस्या परिहार मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के जोवा गांव की रहने वाली हैं। इस गांव की आबादी महज 800 है और यहां साक्षरता दर 63 प्रतिशत है। तपस्या परिहार ने यूपीएससी की परीक्षा में 23वां रैंक हासिल किया। वे लॉ की स्टूडेंट थीं। उन्होंने दूसरे प्रयास में इस परीक्षा में सफलता हासिल की। वे एक किसान की बेटी हैं।
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चार साल के एक बच्चे की मां अनु कुमारी हरियाणा के सोनीपत जिले की रहने वाली हैं। इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स की पढ़ाई की और आईएमटी, नागपुर से एमबीए की डिग्री हासिल की। 31 साल की अनु कुमारी के पति गुड़गांव में एक बिजनेसमैन हैं। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने के लिए दो साल पहले गुड़गांव में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। घर के कामों को करने के साथ बच्चे को संभालते हुए उन्होंने इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की और दूसरा रैंक हासिल किया। उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए कोई कोचिंग क्लास ज्वाइन नहीं किया।
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तमिलनाडु के रहने वाले एम शिवगुरु पैसे की कमी के चलते इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं कर सके। उनके पिता एल्कोहलिक थे। पैसे की कमी के चलते वे चेन्नई में काउंसिलिंग सेशन में नहीं जा सके। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार की सहायता के लिए दो साल तक सॉ मिल में ऑपरेटर का काम किया। उन्होंने खेती भी की। इससे जो कमाई होती थी, उससे परिवार का खर्च पूरा करने के बाद पढ़ाई के लिए भी वे कुछ पैसे बचा लेते थे। उन्होंने सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू की और कड़ी मेहनत कर इसमें सफलता हासिल की। अब वे चेन्नई में आईएएस अफसर हैं।
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राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले अभिषेक सुराना ने सिविल सर्विसेस एग्जामिनेशन में 10वां रैंक हासिल किया। उनका सिलेक्शन बतौर आईपीएस अधिकारी पहले ही हो चुका था और वे ट्रेनिंग कर रहे थे। आईआईटी, दिल्ली से ग्रैजुएशन करने के बाद दो साल तक उन्होंने सिंगापुर और लंदन में नौकरी की। उन्होंने चिली में अपनी एक कंपनी बनाई और काम करने लगे। बाद में उन्होंने भारत वापस लौटने का निर्णय लिया और सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की।
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