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इंजीनियर से IAS बने लड़के ने अपनी गलतियां बताकर UPSC कैंडिडेट्स को किया सचेत, दिए सुपर पावर वाले सक्सेज टिप्स

First Published Oct 16, 2020, 2:38 PM IST
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करियर डेस्क.  IAS Success Story UPSC Topper Ashutosh Kulkarni/ UPSC Success Tips: आज हम जिस टॉपर की बात आपसे करेंगे वे मुख्यतः पुणे के रहने वाले हैं और पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। इनका नाम है आशुतोष कुलकर्णी और इनकी यूपीएससी जर्नी में जो बात प्रेरणादायक है, वह यह कि वे कई बार सफलता के बहुत करीब तक पहुंचे लेकिन सेलेक्ट नहीं हुए पर ऐसे में भी उन्होंने हार नहीं मानी। साक्षात्कार राउंड तक पहुंचकर भी बार-बार चयन न होना काफी तकलीफ देता है लेकिन आशुतोष भी धुन के पक्के थे। वे कमर कस चुके थे कि चाहे जो हो जाए सफल होकर रहेंगे। आखिरकार आशुतोष की पांच साल की मेहनत और धैर्य काम आया और साल 2019 में चौथे प्रयास में उन्हें टॉपर्स की सूची में जगह मिली।  आइए जानते हैं उनसे उनके सफर और बाकी कैंडिडेट्स के लिए जरूरी टिप्स के बारे में- 

नहीं जानते पिछले अटेम्पट्स की गलतियां –

 

दूसरे कैंडिडेट्स से अलग आशुतोष को नहीं समझ आता कि उनके पिछले अटेम्प्ट्स में क्या गलतियां थी। उन्हें लगता है वे शुरू से ही एक जैसी स्ट्रेटजी और तैयारी का तरीका फॉलो करते आ रहे हैं बस कोशिश करते रहे कि पिछली बार से अगली बार और इम्प्रूव कर जाएं। एक इंटरव्यू में आशुतोष कहते हैं कि, मैं नहीं जानता कि पिछले प्रयासों में क्या गलती थी। अपनी तैयारी और स्ट्रेटजी आदि को लेकर वे शुरू से साफ थे। ऐसे में जब बार-बार सेलेक्शन नहीं हुआ तो वे केवल अपने आप को और सुधारने पर काम कर पाए, इससे ज्यादा कुछ नहीं।

नहीं जानते पिछले अटेम्पट्स की गलतियां –

 

दूसरे कैंडिडेट्स से अलग आशुतोष को नहीं समझ आता कि उनके पिछले अटेम्प्ट्स में क्या गलतियां थी। उन्हें लगता है वे शुरू से ही एक जैसी स्ट्रेटजी और तैयारी का तरीका फॉलो करते आ रहे हैं बस कोशिश करते रहे कि पिछली बार से अगली बार और इम्प्रूव कर जाएं। एक इंटरव्यू में आशुतोष कहते हैं कि, मैं नहीं जानता कि पिछले प्रयासों में क्या गलती थी। अपनी तैयारी और स्ट्रेटजी आदि को लेकर वे शुरू से साफ थे। ऐसे में जब बार-बार सेलेक्शन नहीं हुआ तो वे केवल अपने आप को और सुधारने पर काम कर पाए, इससे ज्यादा कुछ नहीं।

कुल चार प्रयासों में से तीन में आशुतोष ने तीनों स्टेज पास की लेकिन दो बार फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। यानी उन्होंने तीन बार प्री और तीन बार मेन्स परीक्षा पास की और तीन बार साक्षात्कार भी दिया लेकिन चौथे प्रयास में सेलेक्ट हो गए। 

 

(Demo Pic)

कुल चार प्रयासों में से तीन में आशुतोष ने तीनों स्टेज पास की लेकिन दो बार फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। यानी उन्होंने तीन बार प्री और तीन बार मेन्स परीक्षा पास की और तीन बार साक्षात्कार भी दिया लेकिन चौथे प्रयास में सेलेक्ट हो गए। 

 

(Demo Pic)

आशुतोष के अनुसार क्या हो स्ट्रेटजी –

 

आशुतोष कहते हैं कि वैसे तो सभी की स्ट्रेटजी अलग होती है पर अगर एक सामान्य राय उन्हें देनी हो तो वे कहेंगे कि प्री के पहले मेन्स की तैयारी करें. अगर परीक्षा में दस या बारह महीने रह गए हैं तो पहले सात या आठ महीने ऑप्शनल को दें। अगर ऑप्शनल लेंदी है तो इससे भी ज्यादा। साथ ही साथ जीएस भी तैयार करते चलें।

 

(Demo Pic)

आशुतोष के अनुसार क्या हो स्ट्रेटजी –

 

आशुतोष कहते हैं कि वैसे तो सभी की स्ट्रेटजी अलग होती है पर अगर एक सामान्य राय उन्हें देनी हो तो वे कहेंगे कि प्री के पहले मेन्स की तैयारी करें. अगर परीक्षा में दस या बारह महीने रह गए हैं तो पहले सात या आठ महीने ऑप्शनल को दें। अगर ऑप्शनल लेंदी है तो इससे भी ज्यादा। साथ ही साथ जीएस भी तैयार करते चलें।

 

(Demo Pic)

उनका मानना है कि पहले मेन्स की तैयारी करें बाद में प्री की। प्री परीक्षा होने के बाद उतना समय नहीं बचता कि मेन्स के लिए तैयारी की जा सके। यह समय केवल रिवीजन, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस और मॉक टेस्ट देने भर का होता है। जब प्री के तीन महीने रह जाएं तो मेन्स को छोड़कर पूरा फोकस प्री पर करें और केवल उसी की तैयारी करें। आशुतोष के हिसाब से यह जनरल स्ट्रेटजी सभी को अपनानी चाहिए।
 

उनका मानना है कि पहले मेन्स की तैयारी करें बाद में प्री की। प्री परीक्षा होने के बाद उतना समय नहीं बचता कि मेन्स के लिए तैयारी की जा सके। यह समय केवल रिवीजन, आंसर राइटिंग प्रैक्टिस और मॉक टेस्ट देने भर का होता है। जब प्री के तीन महीने रह जाएं तो मेन्स को छोड़कर पूरा फोकस प्री पर करें और केवल उसी की तैयारी करें। आशुतोष के हिसाब से यह जनरल स्ट्रेटजी सभी को अपनानी चाहिए।
 

ऑप्शनल के लिए चाहिए पीजी स्तर की नॉलेज –

 

आशुतोष आगे बताते हैं कि जनरल स्टडीज को जनरल इसलिए कहते हैं क्योंकि वह ग्रेजुएशन लेवल की होती है जिसमें बहुत गहराई से नॉलेज की जरूरत नहीं होती। लेकिन ऑप्शनल में कैंडिडेट से उम्मीद की जाती है कि उसे कम से कम पीजी स्तर की जानकारी हो। इसीलिए आशुतोष बार-बार ऑप्शनल विषय की तैयारी पर जोर देते हैं। इसके साथ ही यह विषय आपकी रैंक बनाने में भी बहुत मदद करता है।

(Demo Pic)

ऑप्शनल के लिए चाहिए पीजी स्तर की नॉलेज –

 

आशुतोष आगे बताते हैं कि जनरल स्टडीज को जनरल इसलिए कहते हैं क्योंकि वह ग्रेजुएशन लेवल की होती है जिसमें बहुत गहराई से नॉलेज की जरूरत नहीं होती। लेकिन ऑप्शनल में कैंडिडेट से उम्मीद की जाती है कि उसे कम से कम पीजी स्तर की जानकारी हो। इसीलिए आशुतोष बार-बार ऑप्शनल विषय की तैयारी पर जोर देते हैं। इसके साथ ही यह विषय आपकी रैंक बनाने में भी बहुत मदद करता है।

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दूसरा अहम बिंदु आशुतोष मानते हैं नोट मेकिंग को। वे कहते हैं बिना नोट्स के तैयारी हो ही नहीं सकती। आपने लाख कम सोर्स रखें हों (जोकि करना भी चाहिए) पर पूरी-पूरी किताब से अंत में रिवीजन संभव ही नहीं है। इसलिए शुरुआत से ही क्रिस्प नोट्स बनाते चलें जो कम समय में रिवाइज हो जाएं और जिन्हें पढ़कर आपको पूरा आंसर याद आ जाए। आशुतोष इलेक्ट्रॉनिक नोट्स बनाने की सलाह देते हैं ताकि उन्हें कैरी करना, बदलना, अपडेट करना आसान हो और सालों का समय बीत जाने पर भी वे फटें नहीं और सही अवस्था में बने रहें।

 

(Demo Pic)

दूसरा अहम बिंदु आशुतोष मानते हैं नोट मेकिंग को। वे कहते हैं बिना नोट्स के तैयारी हो ही नहीं सकती। आपने लाख कम सोर्स रखें हों (जोकि करना भी चाहिए) पर पूरी-पूरी किताब से अंत में रिवीजन संभव ही नहीं है। इसलिए शुरुआत से ही क्रिस्प नोट्स बनाते चलें जो कम समय में रिवाइज हो जाएं और जिन्हें पढ़कर आपको पूरा आंसर याद आ जाए। आशुतोष इलेक्ट्रॉनिक नोट्स बनाने की सलाह देते हैं ताकि उन्हें कैरी करना, बदलना, अपडेट करना आसान हो और सालों का समय बीत जाने पर भी वे फटें नहीं और सही अवस्था में बने रहें।

 

(Demo Pic)

आशुतोष की सलाह –

 

आशुतोष दूसरे कैंडिडेट्स को यही सलाह देते हैं कि इस परीक्षा में सफलता पाने का केवल एक ही उपाय है रिवीजन, रिवीजन और रिवीजन. जितना ज्यादा बार रिवाइज कर सकें, करें। इसके अलावा आंसर राइटिंग और मॉक टेस्ट्स भी खूब दें। इससे आपकी प्रैक्टिस होगी और आप समय के अंदर पेपर खत्म कर पाएंगे। अपने आंसर्स को एनालाइज करें और जहां कमी हो उसे दूर करें। वे कहते हैं कि आंसर राइटिंग का सबका अपना तरीका होता है और आपका अपना तरीका प्रैक्टिस से ही इवॉल्व होगा। जहां तक डायग्राम्स आदि की बात है तो हर उत्तर के साथ डायग्राम बनाने की जरूरत नहीं है लेकिन बीच-बीच में इन्हें बनाते रहें।

 

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आशुतोष की सलाह –

 

आशुतोष दूसरे कैंडिडेट्स को यही सलाह देते हैं कि इस परीक्षा में सफलता पाने का केवल एक ही उपाय है रिवीजन, रिवीजन और रिवीजन. जितना ज्यादा बार रिवाइज कर सकें, करें। इसके अलावा आंसर राइटिंग और मॉक टेस्ट्स भी खूब दें। इससे आपकी प्रैक्टिस होगी और आप समय के अंदर पेपर खत्म कर पाएंगे। अपने आंसर्स को एनालाइज करें और जहां कमी हो उसे दूर करें। वे कहते हैं कि आंसर राइटिंग का सबका अपना तरीका होता है और आपका अपना तरीका प्रैक्टिस से ही इवॉल्व होगा। जहां तक डायग्राम्स आदि की बात है तो हर उत्तर के साथ डायग्राम बनाने की जरूरत नहीं है लेकिन बीच-बीच में इन्हें बनाते रहें।

 

(Demo Pic)

अंत में आशुतोष यही कहते हैं कि यह जर्नी कई बार बहुत लंबी हो जाती है तो अपने आप को दुनिया से अलग न करें। मोटिवेशन ऐसा रखें जो बार-बार असफल होने पर भी आपको कदम पीछे न करने दे। दोस्तों को और अपनी हॉबीज को भी समय दें पर यह ध्यान रखें कि सीमा क्रॉस न हो। दिन के आठ से दस घंटे पढ़ने के बाद थोड़ा बहुत समय खुद को रिफ्रेश करने में लगा सकते हैं पर पढ़ाई के साथ कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। मेहनत और धैर्य के साथ लगातार पढ़ेंगे तो सफल जरूर होंगे।

अंत में आशुतोष यही कहते हैं कि यह जर्नी कई बार बहुत लंबी हो जाती है तो अपने आप को दुनिया से अलग न करें। मोटिवेशन ऐसा रखें जो बार-बार असफल होने पर भी आपको कदम पीछे न करने दे। दोस्तों को और अपनी हॉबीज को भी समय दें पर यह ध्यान रखें कि सीमा क्रॉस न हो। दिन के आठ से दस घंटे पढ़ने के बाद थोड़ा बहुत समय खुद को रिफ्रेश करने में लगा सकते हैं पर पढ़ाई के साथ कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। मेहनत और धैर्य के साथ लगातार पढ़ेंगे तो सफल जरूर होंगे।

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