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कोरोना से मरे शख्स को छूने से नहीं होगा इन्फेक्शन, पर इन 3 खतरनाक बीमारियों का हो सकते हैं शिकार

First Published Apr 7, 2020, 7:28 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में फैलता जाता है। जितने लोग संक्रमित के संपर्क में आएंगे ये उतने ही प्रसारित होता जाएगा। ऐसे में जो कोरोना के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं उनका इलाज भी डॉक्टर और नर्से अलग से बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में रखकर कर रहे हैं। कोरोना से दुनियाभर में कई हजार मौतें हो चुकी हैं। ऐसे में रोगियों की लाशों से भी लोग दूरी बनाए हुए हैं। इन रोगियों का इलाज और देखरेख करने वाले डॉक्टर, नर्से, हेल्थ वर्कर्स भी संक्रमित हुए हैं। कुछ डॉक्टरों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में कोरोना मरीजों के शव से संक्रमण फैलने के सावल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के मरीज के शव से संक्रमण नहीं फैलता है लेकिन शव के संपर्क में आने वाले डॉक्टर नर्स या कर्मचारी तीन गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। 

सबसे पहला सवाल उठा कि क्या कोरोना के मरीज की डेड बॉडी (शव) से भी COVID-19 प्रसारित हो सकता है। शव के संपर्क में आने वाले लोग कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं। इसका जवाब आया है- नहीं, शव से संक्रमण प्रसारित नहीं होता।

सबसे पहला सवाल उठा कि क्या कोरोना के मरीज की डेड बॉडी (शव) से भी COVID-19 प्रसारित हो सकता है। शव के संपर्क में आने वाले लोग कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं। इसका जवाब आया है- नहीं, शव से संक्रमण प्रसारित नहीं होता।

WHO के मुताबिक कोरोना से मारे गए व्यक्ति की डेड बॉडी से कोरोना वायरस नहीं फैलता। ये मिथ है। ऐसा कोई केस सामने नहीं आया कि कोरोना के मरीज की लाश छूने वाला संक्रमिता हुआ हो, क्योंकि वायरस परजीवी है। मरीज के मरने पर खत्म हो जाता है।

WHO के मुताबिक कोरोना से मारे गए व्यक्ति की डेड बॉडी से कोरोना वायरस नहीं फैलता। ये मिथ है। ऐसा कोई केस सामने नहीं आया कि कोरोना के मरीज की लाश छूने वाला संक्रमिता हुआ हो, क्योंकि वायरस परजीवी है। मरीज के मरने पर खत्म हो जाता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बुखार (जैसे इबोला, मारबर्ग) और हैजा के मामलों को छोड़कर, आमतौर पर मृत शरीर संक्रामक नहीं होते हैं। केवल महामारी इन्फ्लूएंजा वाले रोगियों के फेफड़े, यदि शव परीक्षा के दौरान अनुचित तरीके से रखा जाता है, तो संक्रामक हो सकता है। अन्यथा शव ऐसे रोग संचारित नहीं करते हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बुखार (जैसे इबोला, मारबर्ग) और हैजा के मामलों को छोड़कर, आमतौर पर मृत शरीर संक्रामक नहीं होते हैं। केवल महामारी इन्फ्लूएंजा वाले रोगियों के फेफड़े, यदि शव परीक्षा के दौरान अनुचित तरीके से रखा जाता है, तो संक्रामक हो सकता है। अन्यथा शव ऐसे रोग संचारित नहीं करते हैं।

यह एक आम मिथक है कि जिन व्यक्तियों की संक्रामक बीमारी से मृत्यु हो गई है, उनको जलाकर अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए लेकिन ये सच नहीं है। 24 मार्च तक COVID -19 से मारे व्यक्तियों के शवों के संपर्क में आने से संक्रमित होने का कोई केस या सबूत सामने नहीं आया है।

यह एक आम मिथक है कि जिन व्यक्तियों की संक्रामक बीमारी से मृत्यु हो गई है, उनको जलाकर अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए लेकिन ये सच नहीं है। 24 मार्च तक COVID -19 से मारे व्यक्तियों के शवों के संपर्क में आने से संक्रमित होने का कोई केस या सबूत सामने नहीं आया है।

लेकिन डब्ल्यूएचओ ने कोरोना संक्रमित और शव के संपर्क में आने वाले डॉक्टर, नर्सों, हेल्थ वर्कर्स अन्य गंभीर बीमारी जकड़ सकती हैं। ये बीमारी इन लोगों की जान भी ले सकती हैं। इसमें यौन रोग एड्स भी शामिल है।

लेकिन डब्ल्यूएचओ ने कोरोना संक्रमित और शव के संपर्क में आने वाले डॉक्टर, नर्सों, हेल्थ वर्कर्स अन्य गंभीर बीमारी जकड़ सकती हैं। ये बीमारी इन लोगों की जान भी ले सकती हैं। इसमें यौन रोग एड्स भी शामिल है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जो लोग लगातार  COVID -19 से मरने वाले लोगों की लाशों के संपर्क में रहे हैं, वे तपेदिक, रक्तवाहक वायरस (जैसे हेपेटाइटिस बी और सी और एचआईवी (एड्स) और पाचन संबंधी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जो लोग लगातार COVID -19 से मरने वाले लोगों की लाशों के संपर्क में रहे हैं, वे तपेदिक, रक्तवाहक वायरस (जैसे हेपेटाइटिस बी और सी और एचआईवी (एड्स) और पाचन संबंधी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

कार्यकर्ता जो नियमित रूप से लाशों को संभालते हैं उन्हें क्षय रोग, रक्तवाहक विषाणु (जैसे हेपेटाइटिस बी और सी और एचआईवी) और जठरांत्र संबंधी संक्रमण (जैसे हैजा, हेपेटाइटिस, रोटावायरस दस्त, साल्मोनेलोसिस, टाइग्लोसिस और टाइफाइड / पैराफॉइड / पैराफॉइड) जैसी जान जोखिम में डालने वाली बीमारियां लग सकती हैं।

कार्यकर्ता जो नियमित रूप से लाशों को संभालते हैं उन्हें क्षय रोग, रक्तवाहक विषाणु (जैसे हेपेटाइटिस बी और सी और एचआईवी) और जठरांत्र संबंधी संक्रमण (जैसे हैजा, हेपेटाइटिस, रोटावायरस दस्त, साल्मोनेलोसिस, टाइग्लोसिस और टाइफाइड / पैराफॉइड / पैराफॉइड) जैसी जान जोखिम में डालने वाली बीमारियां लग सकती हैं।

इसलिए कोरोना मरीजों के संपर्क में आए डॉक्टर्स की मौत ज्यादा तादाद में हुई है। चीन में जिस डॉक्टर ने कोरोना के संक्रमण की जानकारी दी थी उनकी भी कुछ समय के अंदर ही मौत हो गई थी। चीन में कई डॉक्टर कोरोना मरीजों का इलाज करते-करते दम तोड़ गए। दूसरे देशों में भी ये हुआ है।

इसलिए कोरोना मरीजों के संपर्क में आए डॉक्टर्स की मौत ज्यादा तादाद में हुई है। चीन में जिस डॉक्टर ने कोरोना के संक्रमण की जानकारी दी थी उनकी भी कुछ समय के अंदर ही मौत हो गई थी। चीन में कई डॉक्टर कोरोना मरीजों का इलाज करते-करते दम तोड़ गए। दूसरे देशों में भी ये हुआ है।

भारत में कई सौ डॉक्टर कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। पाकिस्तान के एक युवा डॉक्टर की भी मौत हो चुकी है क्योंकि उसने कोरोना संक्रमित लोगों की जांच की थी। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,900 के पार जा पहुंची है। इसकी वजह से सरकार ने बुनियादी ज़रुरतों से जुड़ी चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है।

भारत में कई सौ डॉक्टर कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। पाकिस्तान के एक युवा डॉक्टर की भी मौत हो चुकी है क्योंकि उसने कोरोना संक्रमित लोगों की जांच की थी। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,900 के पार जा पहुंची है। इसकी वजह से सरकार ने बुनियादी ज़रुरतों से जुड़ी चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है।

दुनिया भर में 13 लाख से ज़्यादा कन्फ़र्म केस सामने आये हैं और 74 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी ने लाखों को संक्रमित किया है। चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, इटली, ईरान आदि देशों में कोरोना ने तबाही मचाई हुई है।

दुनिया भर में 13 लाख से ज़्यादा कन्फ़र्म केस सामने आये हैं और 74 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी ने लाखों को संक्रमित किया है। चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, इटली, ईरान आदि देशों में कोरोना ने तबाही मचाई हुई है।

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