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इस गांव के हरेक मुसलमान का बच्चा बॉर्डर पर जाकर दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहता है

First Published Jan 25, 2021, 4:03 PM IST
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देशसेवा से बड़ा दूसरा कोई काम नहीं हो सकता। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बारे में आपने खूब पढ़ा-सुना होगा। यहां के हर गांव का बच्चा फौज में जाने की तैयारी में होता है। यहां के ज्यादातर घरों से कोई न कोई भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में भी ऐसा ही एक गांव है। इस गांव का नाम है मल्लारेडी। यह गांव मुस्लिम बाहुल्य है। यहां के हर घर से कोई न कोई फौजी है। 

मल्लारेडी गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सेकंड वर्ल्ड वार से लेकर चीन और पाकिस्तान से हुए युद्ध तक इस गांव के युवाओं ने फौज में सेवाएं दीं। आज भी इस गांव के कई युवा फौज में हैं या जाने की तैयारी करते देखे जा सकते हैं।

मल्लारेडी गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सेकंड वर्ल्ड वार से लेकर चीन और पाकिस्तान से हुए युद्ध तक इस गांव के युवाओं ने फौज में सेवाएं दीं। आज भी इस गांव के कई युवा फौज में हैं या जाने की तैयारी करते देखे जा सकते हैं।

यहां के रहने वाले बुजुर्ग मस्तान बताते हैं कि वे श्रीलंका में भारतीय सेना का हिस्सा थे। इन्होंने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया। राजस्थान में देश की पश्चिमी सीमा पर ड्यूटी करते हुए ये रिटायर्ड हुए। मस्तान बताते हैं कि इनके दोनों बेटे भी सेना में हैं। इनके चाचा के दो बेटे भी भारतीय फौज का हिस्सा हैं। यह बताते हुए इन्हें गर्व महसूस हुआ।

यहां के रहने वाले बुजुर्ग मस्तान बताते हैं कि वे श्रीलंका में भारतीय सेना का हिस्सा थे। इन्होंने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया। राजस्थान में देश की पश्चिमी सीमा पर ड्यूटी करते हुए ये रिटायर्ड हुए। मस्तान बताते हैं कि इनके दोनों बेटे भी सेना में हैं। इनके चाचा के दो बेटे भी भारतीय फौज का हिस्सा हैं। यह बताते हुए इन्हें गर्व महसूस हुआ।

सेना से रिटायर्ड हुए कासिम अली जम्मू में 17 जाट रेजिमेंट का हिस्सा रहे। 24 साल फौज में रहते हुए लेह लद्दाख में आखिरी ड्यूटी करते हुए रिटायर्ड हुए। इन्होंने इलाहाबाद में ट्रेनिंग ली थी। पहली पोस्टिंग सिकंदराबाद में हुई थी। कासिम कहते हैं कि उन्हें देश की सेवा करने का अवसर मिला, यह उनके लिए सबसे बड़ी गौरव की बात है।

सेना से रिटायर्ड हुए कासिम अली जम्मू में 17 जाट रेजिमेंट का हिस्सा रहे। 24 साल फौज में रहते हुए लेह लद्दाख में आखिरी ड्यूटी करते हुए रिटायर्ड हुए। इन्होंने इलाहाबाद में ट्रेनिंग ली थी। पहली पोस्टिंग सिकंदराबाद में हुई थी। कासिम कहते हैं कि उन्हें देश की सेवा करने का अवसर मिला, यह उनके लिए सबसे बड़ी गौरव की बात है।

यह तस्वीर कासिम अली की है। वे बताते हैं कि इस गांव के कई युवाओं ने पाकिस्तान-चीन से हुए युद्ध में हिस्सा लिया। कारगिल के अलावा श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षा बल(IPKF) में भी भाग लिया।

यह तस्वीर कासिम अली की है। वे बताते हैं कि इस गांव के कई युवाओं ने पाकिस्तान-चीन से हुए युद्ध में हिस्सा लिया। कारगिल के अलावा श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षा बल(IPKF) में भी भाग लिया।

यहां के कई घरों में ऐसी तस्वीर टंगी दिखाई दे जाएंगी। अब सेना से रिटायर्ड हुए गांव के बुजुर्ग युवाओं को स्थानीयस्तर पर ट्रेनिंग देते हैं, ताकि वे फौज में जा सकें। यहां के कई युवा हायर एजुकेशन के बाद भी फौज में जाने को इच्छुक रहते हैं।
 

यहां के कई घरों में ऐसी तस्वीर टंगी दिखाई दे जाएंगी। अब सेना से रिटायर्ड हुए गांव के बुजुर्ग युवाओं को स्थानीयस्तर पर ट्रेनिंग देते हैं, ताकि वे फौज में जा सकें। यहां के कई युवा हायर एजुकेशन के बाद भी फौज में जाने को इच्छुक रहते हैं।
 

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