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सिर दर्द, जुकाम कहीं मुझे कोरोना तो नहीं...जानलेवा वायरस को लेकर आपके मन में उठे हर सवाल का जवाब

First Published Apr 1, 2020, 2:38 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण दुनियाभर में अपने पैर पसार चुका है। अब तक 140 देश कोरोने की चपेट में हैं। लाखों की तादाद में लोग इससे संक्रमित हैं और हजारों की मौत हो चुकी है। कोरोना जानलेवा और घातक है। ऐसे में लोग इसके बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। युवा से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक गूगल पर कोरोना से जुड़े कुछ सवालों के जवाब ढूंढ़ रहे हैं। इस बीमारी के लक्षणों, इलाज के अलावा लोग इसके आसान टारगेट को भी जानने की कोशिश कर रहे हैं। गूगल सर्च में अब तक लोगों ने कोरोना क्या है, इसके लक्षण और ये फ्लू से कितना अलग है जैसे सवाल पूछे। हम आपको गूगल पर लोगों द्वारा बार-बार सर्च किए जा रहे हैं इन सवालों के जवाब दे रहे हैं।

कोरोने से लोगों में दहशत हैं, लोग मामूली खांसी जुकाम होने पर भी परेशान हो जा रहे हैं। हर शख्स खुद को कोरोना से बचाने के लिए गूगल पर इससे जुड़ी बातें जान रहा है। इस बीच लोगों ने कुछ खतरनाक सवाल पूछे। न सिर्फ कोरोना के लक्षण को लेकर बल्कि बच्चों में इसके खतरे को लेकर भी सर्च किया गया।

कोरोने से लोगों में दहशत हैं, लोग मामूली खांसी जुकाम होने पर भी परेशान हो जा रहे हैं। हर शख्स खुद को कोरोना से बचाने के लिए गूगल पर इससे जुड़ी बातें जान रहा है। इस बीच लोगों ने कुछ खतरनाक सवाल पूछे। न सिर्फ कोरोना के लक्षण को लेकर बल्कि बच्चों में इसके खतरे को लेकर भी सर्च किया गया।

बुखार (99.5), थकान, सूखी खांसी, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ महसूस करना इसके प्रमुख लक्षण हैं। कोरोना के लक्षण सामने आने में 2 से 14 दिन का समय लगता है। सूखी बलगम रहित खांसी इसके तेजी से फैलने में मददगार रही है।

बुखार (99.5), थकान, सूखी खांसी, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ महसूस करना इसके प्रमुख लक्षण हैं। कोरोना के लक्षण सामने आने में 2 से 14 दिन का समय लगता है। सूखी बलगम रहित खांसी इसके तेजी से फैलने में मददगार रही है।

कोरोना से संक्रमित हुआ व्यक्ति एक हफ्ते से 14 दिन के अंदर पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। हालांकि ये व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षणता यानि इम्यून सिस्टम पर निर्भर करता है। अधिकतर लोग कोरोना से 15-20 दिनों में ठीक होकर घर चले गए हैं। पर एक बात और है कोरोना संक्रमित की आखिरी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी उसे आइसोलेशन या होम क्वारांटाइन में रहने की सलाह दी जाती है। ठीक होने के बाद भी वह सीधे दूसरों लोगों के संपर्क में नहीं आ सकता।

कोरोना से संक्रमित हुआ व्यक्ति एक हफ्ते से 14 दिन के अंदर पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। हालांकि ये व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षणता यानि इम्यून सिस्टम पर निर्भर करता है। अधिकतर लोग कोरोना से 15-20 दिनों में ठीक होकर घर चले गए हैं। पर एक बात और है कोरोना संक्रमित की आखिरी रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी उसे आइसोलेशन या होम क्वारांटाइन में रहने की सलाह दी जाती है। ठीक होने के बाद भी वह सीधे दूसरों लोगों के संपर्क में नहीं आ सकता।

ये सच है किसी भी संक्रमित चीज को छूने से आप कोरोना की चपेट में आ सकते हैं। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति छींकते वक़्त मुंह पर हाथ रखता है और फिर उसी हाथ से वो किसी चीज़ को छूता है तो वो सतह विषाणु युक्त हो जाती है।दरवाज़े के हैंडल, दूध का पैकेट, कोई कपड़ा भी संक्रमित होकर आपको कोरोना कर सकता है। इनसे दूसरे लोगों को संक्रमण का ख़तरा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक। इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप हाथ नियमित रूप से धोते रहें ताकि संक्रमण का ख़तरा कम हो और कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके।

ये सच है किसी भी संक्रमित चीज को छूने से आप कोरोना की चपेट में आ सकते हैं। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति छींकते वक़्त मुंह पर हाथ रखता है और फिर उसी हाथ से वो किसी चीज़ को छूता है तो वो सतह विषाणु युक्त हो जाती है।दरवाज़े के हैंडल, दूध का पैकेट, कोई कपड़ा भी संक्रमित होकर आपको कोरोना कर सकता है। इनसे दूसरे लोगों को संक्रमण का ख़तरा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस किसी सतह पर भी अस्तित्व में रह सकता है और वो भी कई दिनों तक। इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप हाथ नियमित रूप से धोते रहें ताकि संक्रमण का ख़तरा कम हो और कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके।

चीन से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार बच्चे तुलनात्मक रूप से कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं। हालांकि जिन बच्चों को फेफड़े की बीमारी है या फिर अस्थमा है, उन्हें ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसे मामलों में कोरोना वायरस हमला कर सकता है। ज़्यादातर बच्चों के लिए ये श्वसन संबंधी सामान्य संक्रमण की तरह है और इसमें ख़तरे जैसी कोई बात नहीं है।

चीन से मिल रहे आंकड़ों के अनुसार बच्चे तुलनात्मक रूप से कोरोना संक्रमण से बचे हुए हैं। हालांकि जिन बच्चों को फेफड़े की बीमारी है या फिर अस्थमा है, उन्हें ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसे मामलों में कोरोना वायरस हमला कर सकता है। ज़्यादातर बच्चों के लिए ये श्वसन संबंधी सामान्य संक्रमण की तरह है और इसमें ख़तरे जैसी कोई बात नहीं है।

हां कोरोना वायरस एक नई बीमारी है। इससे पहले कहीं भी किसी में भी कोरोना वायरस बीमारी नहीं हुई न देखी गई। यहां तक की जानवरों में भी। हालांकि चमगादड़ों में कोरोना को फैलाने के लक्षण देखे गए हैं। कोरोना वायरस दरअसल उन वायरस का ही रूप हैं जो जानवरों में बीमारियां पैदा करते हैं। इन वायरस में अब तक सात ऐसे हैं जो जानवरों से इंसान में ट्रांसफर हुए। ये नया वायरस भी उन्हीं में से एक है। इसे हम Covid-19 भी कहते हैं। इसके बाद ये तेज़ी से दुनिया भर के 140 से अधिक देशों में फैला और विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसे महामारी घोषित करना पड़ा। कोरोना वायरस, इंसानों में कोविड 19 नाम की एक बीमारी देता है। हालांकि इसके शुरुआती लक्षण बेहद मामूली होते हैं लेकिन इससे लोगों की जान भी जा सकती है।

हां कोरोना वायरस एक नई बीमारी है। इससे पहले कहीं भी किसी में भी कोरोना वायरस बीमारी नहीं हुई न देखी गई। यहां तक की जानवरों में भी। हालांकि चमगादड़ों में कोरोना को फैलाने के लक्षण देखे गए हैं। कोरोना वायरस दरअसल उन वायरस का ही रूप हैं जो जानवरों में बीमारियां पैदा करते हैं। इन वायरस में अब तक सात ऐसे हैं जो जानवरों से इंसान में ट्रांसफर हुए। ये नया वायरस भी उन्हीं में से एक है। इसे हम Covid-19 भी कहते हैं। इसके बाद ये तेज़ी से दुनिया भर के 140 से अधिक देशों में फैला और विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसे महामारी घोषित करना पड़ा। कोरोना वायरस, इंसानों में कोविड 19 नाम की एक बीमारी देता है। हालांकि इसके शुरुआती लक्षण बेहद मामूली होते हैं लेकिन इससे लोगों की जान भी जा सकती है।

कोरोना वायरस और फ़्लू (बुखार और संक्रामक जुकाम) के कई लक्षण एक जैसे हैं। बिना मेडिकल टेस्ट के इसके अंतर को समझना मुश्किल है। हालांकि कोरोना में व्यक्ति को सूखी खांसी होती है और वो सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगता है। वहीं वायरल और फ्लू के लक्षण बुखार और सर्दी ही है। फ्लू में अक्सर दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे गले में दर्द, जुकाम का एक से दूसरे में फैलना और खांसी भी। कोरोना के कुछ लक्षण फ्लू जैसी ही हैं लेकिन ये घातक हैं। कोरोना को फ्लू समझकर नजरअंदाज करना जान जोखिम में डालने जैसा है लेकिन मामूली फ्लू को कोरोना समझ डरना भी गलत है। हमें सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ से इसके अंतर को समझना होगा, साथ ही अगर फ्लू के लक्षण वाला मरीज कोरोना संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आया है तो उसे कोरोना होने की आशंका रहेगी।

कोरोना वायरस और फ़्लू (बुखार और संक्रामक जुकाम) के कई लक्षण एक जैसे हैं। बिना मेडिकल टेस्ट के इसके अंतर को समझना मुश्किल है। हालांकि कोरोना में व्यक्ति को सूखी खांसी होती है और वो सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगता है। वहीं वायरल और फ्लू के लक्षण बुखार और सर्दी ही है। फ्लू में अक्सर दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे गले में दर्द, जुकाम का एक से दूसरे में फैलना और खांसी भी। कोरोना के कुछ लक्षण फ्लू जैसी ही हैं लेकिन ये घातक हैं। कोरोना को फ्लू समझकर नजरअंदाज करना जान जोखिम में डालने जैसा है लेकिन मामूली फ्लू को कोरोना समझ डरना भी गलत है। हमें सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ से इसके अंतर को समझना होगा, साथ ही अगर फ्लू के लक्षण वाला मरीज कोरोना संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आया है तो उसे कोरोना होने की आशंका रहेगी।

कोरोना वायरस बाकी सारे वायरस केपरिवार का ही हिस्सा है, ये दूसरे विषाणुओं से अपना गुजारा करता है।  इसे 2019 नोवल कोरोनावायरस (2019-nCoV) दिया गया। बाद में 11 फरवरी, 2020 को टैक्सोनोमी ऑफ वायरसेज की इंटरनैशनल कमिटी ने इसका नाम Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus 2 या SARS-CoV2 दिया। इसका नाम SARS-CoV2 इसलिए दिया गया क्योंकि यह उस कोरोनावायरस का जेनेटिक कजन है जिससे 2002 में SARS-CoV फैला था।

कोरोना वायरस बाकी सारे वायरस केपरिवार का ही हिस्सा है, ये दूसरे विषाणुओं से अपना गुजारा करता है। इसे 2019 नोवल कोरोनावायरस (2019-nCoV) दिया गया। बाद में 11 फरवरी, 2020 को टैक्सोनोमी ऑफ वायरसेज की इंटरनैशनल कमिटी ने इसका नाम Severe Acute Respiratory Syndrome Coronavirus 2 या SARS-CoV2 दिया। इसका नाम SARS-CoV2 इसलिए दिया गया क्योंकि यह उस कोरोनावायरस का जेनेटिक कजन है जिससे 2002 में SARS-CoV फैला था।

ये अच्छा सवाल है दरअसल कोरोना से संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। अगर उसने खाना बनाते वक़्त साफ़-सफ़ाई का ठीक से ख़्याल न रखा हो तो इससे कोरोना वायरस के फैलने का खतरा रहता है। कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए ही खाना खाने और छूने से पहले हाथ धोने की  सलाह दी जाती है।

ये अच्छा सवाल है दरअसल कोरोना से संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। अगर उसने खाना बनाते वक़्त साफ़-सफ़ाई का ठीक से ख़्याल न रखा हो तो इससे कोरोना वायरस के फैलने का खतरा रहता है। कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए ही खाना खाने और छूने से पहले हाथ धोने की सलाह दी जाती है।

कोरोना यूं तो बूढ़े, जवान, महिलाएं सभी को फैल रहा हैं। इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है। पर कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों को है। सीनियर सिटीजन का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है ऐसे में उनका शरीर बीमारी से ज्यादा समय तक नहीं लड़ पाता। डायबिटीज, अस्थमा, सांस और फेफड़े संबंधी बीमारी वाले मरीजों को कोरोना का ज्यादा खतरा है।

कोरोना यूं तो बूढ़े, जवान, महिलाएं सभी को फैल रहा हैं। इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है। पर कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों को है। सीनियर सिटीजन का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है ऐसे में उनका शरीर बीमारी से ज्यादा समय तक नहीं लड़ पाता। डायबिटीज, अस्थमा, सांस और फेफड़े संबंधी बीमारी वाले मरीजों को कोरोना का ज्यादा खतरा है।

फिलहाल तो नहीं, कोरोना का अभी कोई इलाज नहीं है। विश्व भर में लगभग 10 क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं लेकिन WHO साफ़ कर चुका है वैक्सीन आने में कम से कम 18 -24  महीने लगेंगे तब तक सोशल डिस्टन्सिंग और सफाई ही उपाय है।

फिलहाल तो नहीं, कोरोना का अभी कोई इलाज नहीं है। विश्व भर में लगभग 10 क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं लेकिन WHO साफ़ कर चुका है वैक्सीन आने में कम से कम 18 -24 महीने लगेंगे तब तक सोशल डिस्टन्सिंग और सफाई ही उपाय है।

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