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रंगभेद के खिलाफ 27 साल जेल में गुजारे, 80 साल की उम्र में की तीसरी शादी, ऐसे थे दक्षिण अफ्रीका के 'गांधी'

First Published Feb 11, 2021, 9:55 AM IST
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11 फरवरी अफ्रीका के 'गांधी' कहे जाने वाले नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) की जिंदगी से जुड़ा खास दिन है। इसी दिन 1990 को वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण 27 साल जेल में गुजारने के बाद रिहा हुए थे। वे दक्षिण अफ्रीका में रंग-भेद की नीतियों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के शीर्ष नेता था। मंडेला को जून, 1964 में राजद्रोह और साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। नेल्सन मंडेला महात्मा गांधी की तरह अहिंसक मार्ग के समर्थक थे। मंडेला अपने लिए गांधीजी को प्रेरणा स्त्रोत मानते थे। आइए पढ़ते हैं मंडेला की कहानी...

नेल्सन रोलीह्लला मंडेला का जन्म 18 जुलाई, 1918 को हुआ था। वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने थे। मंडेला दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चले आ रहे रंगभेद के सख्त खिलाफ थे। वे इसका विरोध करने वाली अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोतों वे सिजवे के अध्यक्ष थे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण मंडेला को 27 साल तक रॉबेन द्वीप की जेल में रहना पड़ा। यहां उनसे कोयला खान में काम कराया जाता था।

(जेल में नेल्सन मंडेला, तस्वीर : जर्गन स्कैडबर्ग/गेटी इमेजिज

नेल्सन रोलीह्लला मंडेला का जन्म 18 जुलाई, 1918 को हुआ था। वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने थे। मंडेला दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चले आ रहे रंगभेद के सख्त खिलाफ थे। वे इसका विरोध करने वाली अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोतों वे सिजवे के अध्यक्ष थे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण मंडेला को 27 साल तक रॉबेन द्वीप की जेल में रहना पड़ा। यहां उनसे कोयला खान में काम कराया जाता था।

(जेल में नेल्सन मंडेला, तस्वीर : जर्गन स्कैडबर्ग/गेटी इमेजिज

11 फरवरी 1990 को श्वेत सरकार से हुए समझौते के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। मंडेला नये दक्षिण अफ्रीका के निर्माण के जनक माने जाते हैं। वे दक्षिण अफ्रीका के अलावा सारी दुनिया में रंगभेद का विरोध करने वाले प्रतीक माने जाते हैं।

(नेल्सन मंडेला की रिहाई के लिए जबर्दस्त आंदोलन हुए थे)

11 फरवरी 1990 को श्वेत सरकार से हुए समझौते के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। मंडेला नये दक्षिण अफ्रीका के निर्माण के जनक माने जाते हैं। वे दक्षिण अफ्रीका के अलावा सारी दुनिया में रंगभेद का विरोध करने वाले प्रतीक माने जाते हैं।

(नेल्सन मंडेला की रिहाई के लिए जबर्दस्त आंदोलन हुए थे)

मंडेला के पिता हेनरी म्फाकेनिस्वा की 13वीं संतानों में तीसरे नंबर के थे। ये सभी लड़के थे। इनके पिता ने तीन शादियां की थीं। ये तीसरी पत्नी नेक्यूफी के पहले लड़के थे। मंडेला ने अपना करियर एक कानूनी फर्म में क्लर्क बनकर शुरू किया। लेकिन राजनीति में रुचि थी। 1944 को अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल होकर रंगभेद के खिलाफ चल रहे आंदोलन में कूद पड़े।

मंडेला के पिता हेनरी म्फाकेनिस्वा की 13वीं संतानों में तीसरे नंबर के थे। ये सभी लड़के थे। इनके पिता ने तीन शादियां की थीं। ये तीसरी पत्नी नेक्यूफी के पहले लड़के थे। मंडेला ने अपना करियर एक कानूनी फर्म में क्लर्क बनकर शुरू किया। लेकिन राजनीति में रुचि थी। 1944 को अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल होकर रंगभेद के खिलाफ चल रहे आंदोलन में कूद पड़े।

मंडेला ने भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए तीन शादियां कीं। इनसे उन्हें छह संतानें हुईं। मंडेला ने पहली शादी अक्टूबर, 1944 को अपनी मित्र वॉल्टर सिसुलू की बहन इवलिन मेस से की। 1961 में देशद्रोह के मुकदमे के दौरान इनकी मुलाकात नोमजामो विनिफ्रेड माडिकिज़ेला से हुई। दोनों ने शादी कर ली। मंडेला ने तीसरी शादी 1998 में यानी 80 साल की उम्र में ग्रेस मेकल से की।

(नेल्सन मंडेल की दूसरी दूसरी पत्नी विनिफ्रेड की तस्वीर)

मंडेला ने भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए तीन शादियां कीं। इनसे उन्हें छह संतानें हुईं। मंडेला ने पहली शादी अक्टूबर, 1944 को अपनी मित्र वॉल्टर सिसुलू की बहन इवलिन मेस से की। 1961 में देशद्रोह के मुकदमे के दौरान इनकी मुलाकात नोमजामो विनिफ्रेड माडिकिज़ेला से हुई। दोनों ने शादी कर ली। मंडेला ने तीसरी शादी 1998 में यानी 80 साल की उम्र में ग्रेस मेकल से की।

(नेल्सन मंडेल की दूसरी दूसरी पत्नी विनिफ्रेड की तस्वीर)

5 दिसंबर, 2013 को फेफड़ों में संक्रमण के चलते मंडेला की मृत्यु हो गई थी। मंडेला दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र के संस्थापक थे। 2004 में जोहान्सबर्ग स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गई। इसके बाद  सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर कर दिया गया। दक्षिण अफ्रीका में मंडेला को लोग मदीबा कहकर पुकारते थे। यह बुजुर्गों के लिए सम्मानसूचक शब्द है।

5 दिसंबर, 2013 को फेफड़ों में संक्रमण के चलते मंडेला की मृत्यु हो गई थी। मंडेला दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र के संस्थापक थे। 2004 में जोहान्सबर्ग स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गई। इसके बाद  सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर कर दिया गया। दक्षिण अफ्रीका में मंडेला को लोग मदीबा कहकर पुकारते थे। यह बुजुर्गों के लिए सम्मानसूचक शब्द है।

यह तस्वीर 11 फरवरी, 1990 की है, जब मंडेला जेल से रिहा हुए थे। इनकी बाहों में बाहों डाले इनकी पत्नी विनिफ्रेड माडिकिज़ेला हैं। यह तस्वीर लंबे समय तक नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के तौर पर देखी जाती रही। दक्षिण अफ्रीका रूढ़िवादी देश रहा है। इसके बावजूद 2005 में मंडेला ने सार्वजनित तौर पर स्वीकार किया था कि उनके बेटे की मौत एड्स से हुई थी।
 

यह तस्वीर 11 फरवरी, 1990 की है, जब मंडेला जेल से रिहा हुए थे। इनकी बाहों में बाहों डाले इनकी पत्नी विनिफ्रेड माडिकिज़ेला हैं। यह तस्वीर लंबे समय तक नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के तौर पर देखी जाती रही। दक्षिण अफ्रीका रूढ़िवादी देश रहा है। इसके बावजूद 2005 में मंडेला ने सार्वजनित तौर पर स्वीकार किया था कि उनके बेटे की मौत एड्स से हुई थी।
 

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