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यहां मकर संक्रांति पर भगवान के पास पहुंचाई जाती है पतंग, विदेशों में ऐसे मनाया जाता है ये त्योहार

First Published Jan 14, 2021, 11:48 AM IST
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हटके डेस्क: 14 जनवरी को भारत में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है। देश में अलग-अलग राज्यों में इसे अलग ढंग से मनाया जाता है। जहां बिहार-झारखंड में इस दिन दही-चूड़ा खाने का रिवाज है, वहीं कई राज्यों में खिचड़ी बनाई जाती है। साउथ में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है तो नॉर्थ में इसे लोहड़ी भी कहा जाता है। हालांकि, इन सभी त्योहारों में फसल की अच्छी पैदावार की कामना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में मनाई जाती है। जी हां, ऐसे कई देश हैं, जहां मकर संक्रांति मनाई जाती है। हालांकि, इसे मनाने का तरीका अलग होता है... 
 

भारत में तो मकर संक्रांति को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसे हर राज्य में अलग-अलग नाम से बुलाया जाता है। लेकिन अंत में हर कोई अच्छी पैदावार और खुशियों की कामना कर इसे सेलिब्रेट करता है। 
 

भारत में तो मकर संक्रांति को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसे हर राज्य में अलग-अलग नाम से बुलाया जाता है। लेकिन अंत में हर कोई अच्छी पैदावार और खुशियों की कामना कर इसे सेलिब्रेट करता है। 
 

भारत के अलावा विदेशों में भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। भारत से बाहर जाकर बसे लोग इसे वहां मानते हैं। हालांकि, कुछ देशों में मकर संक्रांति काफी धूमधाम से मनाया जाता है। 

भारत के अलावा विदेशों में भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। भारत से बाहर जाकर बसे लोग इसे वहां मानते हैं। हालांकि, कुछ देशों में मकर संक्रांति काफी धूमधाम से मनाया जाता है। 

नेपाल में काफी हिंदू बसते हैं। ऐसे में यहां मकर संक्रांति को माघे संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। इसके अलावा इसे सूर्योत्तरायण और थारू समुदाय में माघी के नाम से बुलाया जाता है। नेपाल में लोग इस दिन दान करते हैं और घी, तिल और फल-फूल खा

नेपाल में काफी हिंदू बसते हैं। ऐसे में यहां मकर संक्रांति को माघे संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। इसके अलावा इसे सूर्योत्तरायण और थारू समुदाय में माघी के नाम से बुलाया जाता है। नेपाल में लोग इस दिन दान करते हैं और घी, तिल और फल-फूल खा

म्यांमार में बौद्ध धर्म के लोग मकर संक्रांति मनाते हैं। इसे यहां थिनज्ञान के  बुलाया जाता है। यह त्योहार तीन से चार दिन तक चलता है। इसे न्यू ईयर की ख़ुशी में भी मनाया जाता है। 

म्यांमार में बौद्ध धर्म के लोग मकर संक्रांति मनाते हैं। इसे यहां थिनज्ञान के  बुलाया जाता है। यह त्योहार तीन से चार दिन तक चलता है। इसे न्यू ईयर की ख़ुशी में भी मनाया जाता है। 

श्रीलंका में बिलकुल तमिल नाडु की तरह मनाई जाती है। यहां इसे पोंगल की तरह सेलेब्रेट किया जाता है। इसे श्रीलंका में उजाहवर थिरुनल के नाम से जाना जाता है। 

श्रीलंका में बिलकुल तमिल नाडु की तरह मनाई जाती है। यहां इसे पोंगल की तरह सेलेब्रेट किया जाता है। इसे श्रीलंका में उजाहवर थिरुनल के नाम से जाना जाता है। 

थाईलैंड में भी मकर संक्रांति मनाया जाता है। इसे मनाने का तरीका वहां भी अलग है। इसे कई जगह सॉन्कर्ण नाम से मनाया जाता है। यहां लोग पतंग उड़ाते हैं। कहते हैं कि ये पतंग भगवान के पास जाती है। इसपर कई तरह के मैसेज भी लिखे जाते हैं।  पहले के समय में यहां के राजाओं के बीच पतंगबाजी का मुकाबला होता था।  

थाईलैंड में भी मकर संक्रांति मनाया जाता है। इसे मनाने का तरीका वहां भी अलग है। इसे कई जगह सॉन्कर्ण नाम से मनाया जाता है। यहां लोग पतंग उड़ाते हैं। कहते हैं कि ये पतंग भगवान के पास जाती है। इसपर कई तरह के मैसेज भी लिखे जाते हैं।  पहले के समय में यहां के राजाओं के बीच पतंगबाजी का मुकाबला होता था।  

कंबोडिया में भी मकर संक्रांति को मोहा संगक्रान के नाम से सेलेब्रेट किया जाता है। यहां इसे मना कर लोग पूरे साल खुशहाली की कामना करते हैं। हालांकि, इस सेलिब्रेशन में हिंदू धर्म की झलक दिखती है। 

कंबोडिया में भी मकर संक्रांति को मोहा संगक्रान के नाम से सेलेब्रेट किया जाता है। यहां इसे मना कर लोग पूरे साल खुशहाली की कामना करते हैं। हालांकि, इस सेलिब्रेशन में हिंदू धर्म की झलक दिखती है। 

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