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नंदी की रक्षा करने नागदेवता इसी पहाड़ी के नीचे आए थे, हर मौसम में रहता हूं सदाबहार, बूझो मैं कौन?

First Published Dec 24, 2020, 10:36 PM IST
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राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है माउंट आबू। यह हर सीजन में चर्चा में रहता है। ठंड में यह उत्तरभारत के बर्फवारी वाली जगहों-सा एहसास कराता है। इस समय यहां टैम्परेचर जीरो से नीचे तक जा रहा है। उत्तरी भारत में होने वाली बर्फवारी का असर माउंट आबू पर जबर्दस्त पड़ता है। यहां ओंस की बूंदें बर्फ में बदल रही हैं। बुधवार को यहां न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यह जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा वन्य जीवन और सदाबहार मौसम के लिए जाना जाता है। यहां सालभर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। आइए जानते हैं माउंट आबू की खासियत....

माउंट आबू राजस्थान के सिरोही जिले एक एक हिल स्टेशन है। यह अरावली पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य के चलते यह हिल स्टेशन देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां हर सीजन में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। गर्मियों में यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
(फोटो सोर्स- google)

माउंट आबू राजस्थान के सिरोही जिले एक एक हिल स्टेशन है। यह अरावली पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य के चलते यह हिल स्टेशन देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां हर सीजन में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। गर्मियों में यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
(फोटो सोर्स- google)

1190 ई के समय आबू पर राजा जेतसी परमार भील का शासन था।  फिर यह आबू भीम देव द्वितीय के शासन का क्षेत्र बना। इसके बाद चौहान साम्राज्य में आ गया। आखिर में सिरोही के महाराजा ने माउंट आबू को राजपूताना मुख्यालय के लिए अंग्रेजों को पट्टे पर दे दिया था। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों का यह पसंदीदा स्थान था।
(फोटो सोर्स-Bhawna Sati के फेसबुक पेज से)
 

1190 ई के समय आबू पर राजा जेतसी परमार भील का शासन था।  फिर यह आबू भीम देव द्वितीय के शासन का क्षेत्र बना। इसके बाद चौहान साम्राज्य में आ गया। आखिर में सिरोही के महाराजा ने माउंट आबू को राजपूताना मुख्यालय के लिए अंग्रेजों को पट्टे पर दे दिया था। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों का यह पसंदीदा स्थान था।
(फोटो सोर्स-Bhawna Sati के फेसबुक पेज से)
 

माउंट आबू जैन धर्म के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक  है। इसका इतिहास लोगों को आकर्षित करता है। पौराणिक कहानियों में माउंट आबू को‘अर्बुदरान्य’ के नाम से जाना जाता था। कहते हैं कि यह नाम नाग देवता ‘अर्बुदा’ के नाम पर पड़ा। कहावते हैं कि भगवान शिव के पवित्र बैल नंदी जब मुसीबत में फंसे, तो नागदेवता अर्बुदा उनकी रक्षा के लिए इसी पहाड़ी के नीचे आए थे।
(फोटो सोर्स-मैं मुसाफिर हूं ब्लॉग से)

माउंट आबू जैन धर्म के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक  है। इसका इतिहास लोगों को आकर्षित करता है। पौराणिक कहानियों में माउंट आबू को‘अर्बुदरान्य’ के नाम से जाना जाता था। कहते हैं कि यह नाम नाग देवता ‘अर्बुदा’ के नाम पर पड़ा। कहावते हैं कि भगवान शिव के पवित्र बैल नंदी जब मुसीबत में फंसे, तो नागदेवता अर्बुदा उनकी रक्षा के लिए इसी पहाड़ी के नीचे आए थे।
(फोटो सोर्स-मैं मुसाफिर हूं ब्लॉग से)

इतिहासकार बताते हैं कि माउंट आबू को गुर्जरों या गुज्जरों ने बसाया था। यहां मिले प्राचीन शिलालेखों में इस बात का उल्लेख मिलता है। माउंट आबू आज नक्की झील, सूर्यास्त स्थल और वन्य जीवन की खूबसूरत के लिए ख्यात है।
(फोटो सोर्स-flickr)
 

इतिहासकार बताते हैं कि माउंट आबू को गुर्जरों या गुज्जरों ने बसाया था। यहां मिले प्राचीन शिलालेखों में इस बात का उल्लेख मिलता है। माउंट आबू आज नक्की झील, सूर्यास्त स्थल और वन्य जीवन की खूबसूरत के लिए ख्यात है।
(फोटो सोर्स-flickr)
 

माउंट आबू पर कई धार्मिक स्थल हैं। इनमें दिलवारा के जैन मंदिर, आधार देवी मंदिर, दूध बावड़ी, श्री रघुनाथ जी मंदिर और अचलगढ़ किला सबसे प्रसिद्ध हैं। माउंट आबू उदयपुर से 185 किमी दूर है। अगर आप हवाई यात्रा से आना चाहते हैं, तो उदयपुर आना होगा। आबू रोड तक दूसरे साधन उपलब्ध हैं। यहां से बस या प्राइवेट वाहन से माउंट आबू जाया जा सकता है।

(फोटो सोर्स-eragenx.com)

माउंट आबू पर कई धार्मिक स्थल हैं। इनमें दिलवारा के जैन मंदिर, आधार देवी मंदिर, दूध बावड़ी, श्री रघुनाथ जी मंदिर और अचलगढ़ किला सबसे प्रसिद्ध हैं। माउंट आबू उदयपुर से 185 किमी दूर है। अगर आप हवाई यात्रा से आना चाहते हैं, तो उदयपुर आना होगा। आबू रोड तक दूसरे साधन उपलब्ध हैं। यहां से बस या प्राइवेट वाहन से माउंट आबू जाया जा सकता है।

(फोटो सोर्स-eragenx.com)

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