माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन स्नान, दान, श्राद्ध व व्रत का विशेष महत्व है। इस बार ये अमावस्या 24 जनवरी, शुक्रवार को है।

उज्जैन. मौनी अमावस्या पर इस बार आनंद नाम का योग बन रहा है। मौनी अमावस्या पर स्नान-दान के लिए दिनभर ही पर्व काल रहेगा। इस दिन कैसे व्रत और पूजा करें, जानिए-

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मौनी अमावस्या पर है मौन रहने का महत्व...
- धर्म शास्त्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर मौन रहकर अथवा मुनियों के समान आचरण करने का विशेष महत्व है।
- अमावस्या तिथि होने से चंद्रमा सूर्य के साथ मकर राशि में होते हैं, जो शनि के स्वामित्व वाली राशि है।
- सूर्य एवं चंद्रमा दोनों से शनि शत्रु का भाव रखते हैं। चंद्रमा मन का स्वामी है उसके शत्रु राशि मे होने से मन चंचल होने के संभावना रहती है एवं स्वयं का अहित करने वाले विचार मन में आ सकते है।
- इसलिए इस दिन संयम पूर्वक बिताने की सलाह एवं मुनियों जैसा जीवन बिताने की सलाह हमारे धर्म ग्रंथों में दी गई है।

किसी को बुरा न बोलें...
- अमावस्या पर चंद्रमा दिखाई नही देता, जिससे शरीर में एक महत्वपूर्ण तत्व जल का संतुलन ठीक नही रहता। इस कारण निर्णय सही नही हो पाते और नकारात्मकता अधिक होती है।
- इस अमावस्या तिथि पर मौन रहने का बड़ा महत्व माना गया है तथा संयम पूर्वक रहने का विधान है। अमावस्या को सूर्य चंद्रमा की युति वाणी संयम के लिए भी आवश्यक मानी गई अर्थात मौन रहें।
- यह नही हो सके तो किसी के भी प्रति कटु शब्दों को प्रयोग नही करें एवं असत्य भाषा से बचने का प्रयास करें। वाणी के इस संयम को भी मौन की संज्ञा दी गई है।