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तुला संक्रांति आज: इस दिन तीर्थ स्नान, दान और सूर्य पूजा से बढती है उम्र और पॉजिटिवीटी

17 अक्टूबर, शनिवार को सूर्य राशि बदलकर कन्या से तुला में प्रवेश करेगा। इसे तुला संक्रांति कहते हैं। इस दिन सूर्य उत्तरी से दक्षिणी गोलार्द्ध में चला जाता है।

Tula Sankranti today: On this day, pilgrimage bath, charity and sun worship increase age and positivity KPI
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Ujjain, First Published Oct 17, 2020, 9:36 AM IST
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उज्जैन. सूर्य के बदलाव के कुछ ही दिनों बाद शरद ऋतु खत्म हो जाती है और हेमंत ऋतु शुरू हो जाती है। 17 अक्टूबर से 16 नवंबर तक सूर्य तुला राशि में रहेगा।
काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार, ऋग्वेद सहित पद्म, स्कंद और विष्णु पुराण के साथ ही महाभारत में सूर्य पूजा का महत्व बताया गया है। तुला संक्रांति पर तीर्थ स्नान, दान और सूर्य पूजा करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। इससे उम्र बढ़ती है। सूर्य पूजा से सकारात्मकता ऊर्जा मिलती है और इच्छा शक्ति भी बढ़ती है।

तुला संक्रांति से ही नवरात्र शुरू
पं. मिश्रा के अनुसार, इस बार ऐसा संयोग बन रहा है जब तुला संक्रांति पर ही नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। आमतौर ये संक्रांति नवरात्रि से पहले या नवरात्रि के दौरान पड़ती है। इन दो पर्वों का संयोग देश के शुभ रहेगा। इससे सुख और समृद्धि बढ़ेगी। सूर्य और शक्ति के प्रभाव से महामारी को असर भी कम होने की संभावना है। इन दोनों पर्व को पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। राशि परिवर्तन के समय सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाती है।

क्या है तुला संक्रांति?
- सूर्य का तुला राशि में प्रवेश करना तुला संक्रांति कहलाता है। यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने में पड़ता।
- कुछ राज्य में इस पर्व का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। इनमें मुख्य उड़ीसा और कर्नाटक है।
- यहां के किसान इस दिन को अपनी चावल की फसल के दाने के आने की खुशी के रूप में मनाते हैं। इन राज्यों में इस पर्व को बहुत अच्छे ढंग से मनाया जाता है।
- तुला संक्रांति का कर्नाटक और उड़ीसा में खास महत्व है। इसे तुला संक्रमण भी कहा जाता है। इस दिन कावेरी के तट पर मेला लगता है, जहां स्नान और दान-पुण्य किया जाता है।
- तुला संक्रांति और सूर्य के तुला राशि में रहने वाले पूरे 1 महीने तक पवित्र जलाशयों में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है।
- तुला संक्रांति का समय जो होता है उस दौरान धान के पौधों में दाने आना शुरू हो जाते हैं। इसी खुशी में मां लक्ष्मी का आभार जताने के लिए ताजे धान चढ़ाएं जाते हैं।
 

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