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राम मंदिर के इंतजार में 27 साल से व्रत पर थी ये महिला, SC के फैसले के बाद अब ग्रहण करेगी अन्न

जब 1992 अयोध्या का विवादित ढांचा टूटने के बाद जिस तरह से देश में दंगे हुए और खून-खराबा हुआ तो वह दुखी हो गईं। बस उसी दिन से उन्होंने संकल्प ले लिया की जब तक राम मंदिर का कोई फैसला और भाईचारे के साथ मंदिर का निमार्ण नहीं हो जाता मैं अन्न ग्रहण नहीं करुंगी। चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए।

ayodhya verdict  81 year old women not eaten food for 27 years waiting verdict of ram mandir
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Jabalpur, First Published Nov 11, 2019, 11:24 AM IST
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जबलपुर (मध्य प्रदेश). सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन रामलला को दे दी। राम मंदिर निमार्ण के लिए देश के हजारों लोगों ने कई तरह का बलिदान दिया है। लेकिन सबसे ज्यादा अगर किसी ने त्याग किया है तो वह हैं यह बुजुर्ग महिला। जिन्होंने राम मंदिर फैसले के इंतजार में 27 सालों से अन्न ग्रहण नहीं किया।

परिवार और रिश्तेदार बनाते रहे दबाव
दरअसल, हम जिस महिला की बात कर रहे हैं वह मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की 87 वर्षीय की उर्मिला चतुर्वेदी हैं। जिन्होंने साल 1992 के बाद अन्न का एक दाना तक नहीं खाया। उन्होंने खाने के रुप में पिछले 27 साल से फल और दूध ही लिया है। परिवार के लोगों ने उनको बहुत समझाया लेकिन वह अपने संकल्प तोड़ने पर डटी रहीं।

बेटे ने कहा सालों का सपन हो गया पूरा
शनिवार को जब राम मंदिर निमार्ण का फैसला आया तो उनका परिवार सबसे ज्यादा खुश था। उर्मिला चतुर्वेदी के बेटे विवेक ने मीडिया से बात करते हुए कहा-मेरी मां का सालों का संकल्प आज पूरा हो गया। वह अब मां को खाना खाते हुए देख सकेंगे। हमारे लिए इससे बड़ी और कोई खुशी नहीं है।

27 साल के उपवास के बाद मिली सफलता
बता दें कि उर्मिला चतुर्वेदी एक शिक्षिका हैं। वह निजी संस्थानों में संस्कृत पढ़ाती थीं। लेकिन जब 1992 अयोध्या का विवादित ढांचा टूटने के बाद जिस तरह से देश में दंगे हुए और खून-खराबा हुआ तो वह दुखी हो गईं। बस उसी दिन से उन्होंने संकल्प ले लिया की जब तक राम मंदिर का कोई फैसला और भाईचारे के साथ मंदिर का निमार्ण नहीं हो जाता मैं अन्न ग्रहण नहीं करुंगी। चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए।

अयोध्या जाकर तोड़ेंगी अपना व्रत
 जब 9 नवंबर को फैसला आया तो उन्होंने सबसे पहले शहर के राम भगवान के मंदिर जाकर प्रणाम किया। शनिवार के दिन उनके परिवार ने उनको खाना खिलाने की कोशिश की तो उन्होंने मना कर दिया। उर्मिला चतुर्वेदी ने कहा अब तो मैं अयोध्या नगरी में जाकर ही कुछ खाऊंगी।

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