विधानसभा की 28 सीटों के लिए मंगलवार को प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो गया। इस बार 2018 की तुलना में 3 प्रतिशत कम वोटिंग हुई। यह इस इस बार 69.68% रही। जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में 72.93% वोटिंग हुई थी। विश्लेषकों की मानें, तो कम वोटिंग होना सरकार की सेहत पर असर डाल सकती है। लेकिन शिवराज को अपनी सरकार बचाने सिर्फ 9 सीटों की जरूरत है, इस लिहाज से कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा। 

भोपाल, मध्य प्रदेश. विधानसभा की 28 सीटों के लिए मंगलवार को प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो गया। कांग्रेस ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उसे उम्मीद है कि अगर वो 21 सीटें जीत लेती है, तो सपा-बसपा और निर्दलीयों को अपने पक्ष में कराकर दुबारा सरकार बना सकती है। हाल में दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी के इस्तीफा देने के बाद एक सीट और रिक्त हो गई है। चुनाव यह साबित कर देगा कि जनता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए विधायकों के फैसले से खुश है या नाराज। रिजल्ट 10 नवंबर को आएगा। 

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ये थे मुद्दे
भाजपा ने सभी को कोरोना वैक्सीन मुफ्त देने, किसानों को सम्मान निधि को चार हजार रुपए बढ़ाने, सहरिया, बैगा और भारिया जाति के आदिवासियों को एक हजार रुपए सहयोग राशि देने,अनाज की पूरी खरीदी करने, किसानों को फसल बीमा का पैसा और जीरो प्रतिशत पर लोन देने का वादा किया था। इसके अलावा कांग्रेस सरकार में बंद हुईं संबल, लाड़ली, सीएम कन्यादान, पीएम आवास, मेधावी फिर से शुरू करने का ऐलान किया था। वहीं, कांग्रेस ने कर्जमाफी योजना आगे भी जारी रखने, शासकीय सेवा से निकाले जाने वाले संविदा कर्मचारी की बहाली, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका का मानदेय बढ़ाने, 100 रुपए में सौ यूनिट बिजली देने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि एक हजार रुपए करने का वादा किया है।

वोटिंग के दौरान कमलनाथ भोपाल के गुफा मंदिर पहुंचे। इस दौरान पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घर पर पूजा-अर्चना की।