कोरोना महामारी के बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने अमरनाथ यात्रा को रद्द करने का फैसला किया है। अमरनाथ यात्रा 23 जून से शुरू होने वाली थी लेकिन कोरोना के लॉकडाउन के चलते शुरू नहीं हुई। इस बार सिर्फ छड़ी मुबारक का पूजन होगा। इससे पहले जम्मू  कश्मीर प्रशासन ने कहा था कि 21 जुलाई से यात्रा शुरू हो सकती है।

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने अमरनाथ यात्रा को रद्द करने का फैसला किया है। अमरनाथ यात्रा 23 जून से शुरू होने वाली थी लेकिन कोरोना के लॉकडाउन के चलते शुरू नहीं हुई। इस बार सिर्फ छड़ी मुबारक का पूजन होगा। इससे पहले जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कहा था कि 21 जुलाई से यात्रा शुरू हो सकती है।

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यात्रियों को लिए कोविड अस्पताल की भी व्यवस्था कर ली गई थी

इससे पहले जून में श्राइन बोर्ड ने केवल बालटाल के रास्ते से यात्रा के संचालन का फैसला किया था और पारंपरिक पहलगाम के रास्ते तैयारी पूरी ना होने के कारण यात्रा को स्थगित रखने का फैसला लिया था। बता दें कि यात्रियों के लिए कोविड अस्पताल का भी निर्माण किया गया है।

स्थानीय लोगों में भी था कोरोना का डर

डोगरा समाज के लोगों ने कहा था कि अगर यात्रा को इजाजत दी जाती है तो कोरोना को देखते हुए सभी तरह के उपाय लागू किए जाएं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा ना हो लोग यात्रा के लिए आएं और यहां क्वारन्टीन हो जाएं।

क्या है अमरनाथ यात्रा?

अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर में समुद्रतल से 13,600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। 

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