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बिहार में सिर्फ 34% के पास स्मार्ट फोन, वर्चुअल प्रचार कैसे संभव..आयोग ने पूछा, फिर क्या तरीका हो?

कोरोना महामारी के बीच चुनाव भी नजदीक आ गए हैं। आयोग ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों से सुझाव मांगे हैं कि चुनाव में प्रचार और जनसभाओं का तरीका क्या होना चाहिए? 31 जुलाई तक भी को अपना-अपना सुझाव देना है।  

Election Commission asked national and regional parties how to campaign kpn
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New Delhi, First Published Jul 18, 2020, 1:14 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच चुनाव भी नजदीक आ गए हैं। आयोग ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों से सुझाव मांगे हैं कि चुनाव में प्रचार और जनसभाओं का तरीका क्या होना चाहिए? 31 जुलाई तक भी को अपना-अपना सुझाव देना है।  

बिहार की 9 पार्टियों ने वर्चुअल प्रचार का विरोध किया
बिहार की 9 राजनीतिक पार्टियो ने वर्जुअल प्रचार के प्रस्ताव का विरोध किया है। दरअसल, कोरोना महामारी में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। ऐसे में चुनाव के दौरान रैलियां करना संभव नहीं है। हालांकि बिहार की 9 पार्टियों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर वर्चुअल प्रचार के प्रस्ताव का विरोध किया। 

बिहार में सिर्फ 34% लोगों के पास स्मार्ट फोन
पत्र में लिखा गया है कि बिहार में सिर्फ 34% लोगों के पास ही स्मार्ट फोन है। ऐसे में वर्चुअल रैली में सभी को जोड़ना मुश्किल है। पत्र में सवाल उठाया गया कि क्या ऐसे में निष्पक्ष चुनाव कराना संभव हो पाएगा?

चुनाव आयोग को किसने-किसने लिखा पत्र
चुनाव आयोग को पत्र लिखने वालों में राजद के साथ कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), आरएलएसपी, वीआईपी, हम (से) और एलजेडी के नेता भी शामिल थे।

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