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50 कुओं पर टिका है ताजमहल का वजन, नींव को पड़ती है पानी की जरूरत, हैरान करने वाले फैक्ट्स

प्यार की निशानी, भारत की शान दुनिया के अजूबों में शामिल ताजमहल किसी परिचय का मोहताज नहीं। यह सभी अजूबों में सबसे खूबसूरत है। 42 एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में कई ऐसे फैक्ट्स है, जिन्हें गिने-चुने लोग ही जानते हैं...

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Agra, First Published Aug 7, 2022, 10:57 AM IST

Dil Se Desi : भारत में आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi ka Amrit Mahotsav) चल रहा है। 15 अगस्त, 2022  को आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में हम आपको उन मशहूर और यादगार स्मारक, मंदिर व म्यूजियम के बारें में बता रहे हैं, जो हिंदुस्तान के माथे पर लगे मुकुट में नगीने के समान हैं। 'दिल से देसी' सीरीज में बात प्यार की निशानी ताजमहल (Taj Mahal) के उन फैक्ट्स की जो आपको हैरानी में डाल देंगे...

50 कुओं पर टिका है ताजमहल का वजन
जब किसी बिल्डिंग या इमारत को बनाया जाता है तो उसका निर्माण अक्सर नमी वाली जगह से दूर किया जाता है लेकिन सोचने वाली बात है कि मुगल सम्राट शाहजहां ने फिर यमुना नदी से सटाकर ही क्यों ताजमहल का निर्माण कराया। एक बात और अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो ताजमहल की नींव कुछ ही सालों में ध्वस्त हो गई होती। जानकर चौंक जाएंगे कि ताजमहल की नींव में 50 कुएं हैं। इन्हीं कुओं पर ताजमहल टिका हुआ है। जब इसका निर्माण हो रहा था, तब कुओं में आबनूस और महोगनी की लकड़ियां भरी गई थी। चूंकि इन लड़कियों की मजबूती के लिए पानी की आवश्यकता पड़ती है. इसलिए इन कुओं को इस तरह बनवाया गया था, जिससे उन्हें यमुना नदी का पानी मिलता रहे। 

जितना पानी, उतनी बढ़ेगी खूबसूरती
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कोशिश रहती है कि ताजमहल के पीछे लबालब पानी भरा रहे क्योंकि ताजमहल के पीछे जितना ज्यादा पानी होगा, खूबसूरती भी उसकी उतनी ही अधिक होगी। क्योंकि आगरा में ताजमहल के निर्माण में लगे संगमरमर और पानी का तालमेल सबसे खूबसूरत नजारा बनाता है। 

ताजमहल से जुड़े इन फैक्ट्स को भी जानें

  • ताजमहल की मिनारें इस तरह बनवाई गई हैं कि अगर तेज झटके का भूकंप भी आ जाए तो ये मिनारें बीच में मौजूद मुख्य गुंबद पर कभी भी नहीं गिरेंगी। भूकंप की स्थिति में अगर ये गिरती हैं तो बाहर की तरफ गिरेंगे।
  • ताजमहल को शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। ताजमहल को सफेद बनवाने के बाद उन्होंने सोचा था कि यमुना पार एक काले रंग का ताजमहल बनवाया जाए। शाहजहां चाहते थे कि इस काले ताजमहल में मौत के बाद उन्हें दफनाया जाए लेकिन काले रंग का ताजमहल नहीं बनवाया।
  • ताजमहल बनाने में 22 साल का समय लगा था। 22,000 से ज्यादा मजदूरों ने इसका निर्माण किया था। ताजमहल का सामान लाने के लिए 1,000 हाथियों का इस्तेमाल किया गया था। उस वक्त इसे बनाने में 3.2 करोड़ रुपए का खर्च आया था।
  • ताजमहल का निर्माण कई देशों से लाए गए बहुमूल्य पत्थर से कराया गया है। इसमें लगे 28 तरह के रत्न श्रीलंका और चीन से लाए गए थे, भारत के अलग-अलग राज्यों से भी सामान मंगवाए गए थे। संगमरमर के सफेद पत्थर राजस्थान से, जैस्पर पंजाब से, नीला रत्न तिब्बत से, पन्ना श्रीलंका से और क्रिस्टल चीन से मंगाए गए थे।
  • ताजमहल का रंग दिन के समय के अनुसार हल्का-हल्का बदलता रहता है। दिन के वक्त यह गुलाबी छटा लिए होता है, दोपहर में दूधिया सफेद और शाम को हल्का सुनहरा। चांद की चांदनी में ताजमहल सबसे खूबसूरत नजर आता है।
  • ताजमहल की वास्तु शैली में फारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला का मिश्रण है। 1632 ई. में यह बनकर तैयार हुआ था। 1653 में गुंबद का निर्माण पूरा हुआ था। 
  • एक फैक्ट ये भी कि ताजमहल को आगरा में नहीं बल्कि बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) में बनाए जाने का विचार था। क्योंकि यहीं पर प्रसव के दौरान मुमताज महल का निधन हुआ था। लेकिन बुरहानपुर में सफेद संगेमरमर की न मिल पाने के कारण इसे आगरा में बनवाने का फैसला लिया गया।

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