पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा कि अंबेडकर ने महिलाओं से स्वयं आग्रह किया था कि वे खुद को शादी के लिए मजबूर न होने दें। उन्होंने महिलाओं से शादी में देरी करने, बच्चे के जन्म में देरी करने का आग्रह किया। उन्होंने उनसे अपने पति के बराबर खड़े होने का आग्रह किया।

Dr.Ambedkar first male Feminist: कांग्रेस के सीनियर लीडर शशि थरूर ने डॉ.अंबेडकर को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। शशि थरूर ने कहा कि डॉ.बीआर अंबेडकर भारत के पहले पुरुष नारीवादी थे। वह महिलाओं के प्रति दशकों पहले ऐसे विचार रखते थे जिन्हें वर्तमान पीढ़ी के राजनेताओं को कुछ सीखना चाहिए। वह आज की पीढ़ी के नेताओं से भी अधिक प्रगतिशील रहे हैं। अंबेडकर से आज की पीढ़ी को सीखना चाहिए, उनको पढ़ना चाहिए। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

थरूर, शनिवार को गोवा हेरिटेज फेस्टिवल के दौरान एक सेशन को संबोधित कर रहे थे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह (अंबेडकर) शायद भारत के पहले पुरुष नारीवादी थे। 1920, 30, 40 में महिलाओं के प्रति उनके उदार विचार से सीख ली जा सकती है। वह महिलाओं को उस समय बराबरी का अधिकार देने के प्रति बेहद संवेदनशील थे। वह महिलाओं से उनके अधिकारों के प्रति बातचीत करते थे। वह महिलाओं को पुरुषवादी वर्चस्व से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करते थे। दरअसल, शशि थरूर अपनी लेटेस्ट किताब "अंबेडकर: ए लाइफ" के बारे में बात कर रहे थे।

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा कि अंबेडकर ने महिलाओं से स्वयं आग्रह किया था कि वे खुद को शादी के लिए मजबूर न होने दें। उन्होंने महिलाओं से शादी में देरी करने, बच्चे के जन्म में देरी करने का आग्रह किया। उन्होंने उनसे अपने पति के बराबर खड़े होने का आग्रह किया।

महिला श्रमिकों और मजदूरों के लिए भी लड़े थे अंबेडकर

शशि थरूर ने कहा कि अंबेडकर ने एक विधायक के रूप में महिला श्रमिकों और मजदूरों के लिए लड़ाई लड़ी थी। 80-90 साल पहले यह इस आदमी की एक उल्लेखनीय नारीवादी सोच थी। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर को एक दलित नेता के रूप में देखने की प्रवृत्ति है। वह देश के प्रमुख दलित नेता थे। अपने शुरुआती 20 के दशक से, वह एक प्रभावशाली आवाज थे और अधिक से अधिक प्रभावशाली हो गए।

अमेरिका में देश की छवि खराब थी...

शशि थरूर ने कहा कि संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष होने के नाते अम्बेडकर एक असाधारण संविधानविद थे। उन्होंने ही संविधान के प्रत्येक प्रावधान को प्रस्तुत किया और उसका बचाव किया।
वैश्विक स्तर पर भारत की छवि पर एक सवाल के जवाब में थरूर ने कहा कि 1975 में अमेरिका में देश की छवि खराब थी। यह एक गरीब देश माना जाता था और भारत के बारे में लोगों का विचार कील-बिस्तर पर सोने वाले फकीरों या सपेरों द्वारा सड़क पर चालबाजी करने के बारे में था। वहां से परिवर्तन आश्चर्यजनक रहा है। 

सदी के अंत में भारतीय सॉफ्टवेयर क्रांति को याद किया जाएगा

उन्होंने कहा कि सहस्राब्दी के अंत में हमारे पास उपलब्धियों के रूप में भारतीय सॉफ्टवेयर क्रांति है। अचानक से भारतीयों की वैश्विक पूछ बढ़ गई। थरूर ने कहा कि 'Y2K' घटना भारतीय कंप्यूटर पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। उन्होंने कहा कि एक डर था कि सभी कंप्यूटर क्रैश हो जाएंगे...अचानक हमें भारतीयों से उस समस्या को दूर करने के लिए कोड करने की मांग हुई और तभी भारत की सॉफ्टवेयर क्रांति वास्तव में शुरू हुई। अचानक से ऐसा हुआ कि भारतीय सपेरे और गरीब से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में याद किए जाने लगे। 

यह भी पढ़ें:

राहुल गांधी के सावरकर को अंग्रेजों का आज्ञाकारी बताने पर भड़की बीजेपी ने साधा ठाकरे परिवार पर निशाना...

संसदीय स्थायी कमेटियों की मीटिंग से 'गायब' रहते सांसद जी...लापरवाह सांसदों में सबसे अधिक इस पार्टी के MPs