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BJP ने जिस पार्टी से किया गठबंधन, उसका MLA रेप केस में भगोड़ा घोषित, जानें क्या ये कांग्रेस का काउंटर अटैक है?

लुधियाना में बलविंदर सिंह बैंस और सिमरजीत सिंह बैंस 2012 में लुधियाना दक्षिण और आत्म नगर से चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में वे जीत गए। उन्होंने 2017 में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करते हुए पांच सीट पर चुनाव लड़ा। 

Punjab Election 2022 BJP Allied Lok Insaaf Party chief MLA Simarjit Singh Bains Accused rape case declared fugitive know why counter attack Congress UDT
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Punjab, First Published Jan 21, 2022, 10:30 AM IST

चंडीगढ़। लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख और आत्म नगर से विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को बलात्कार के एक मामले में कोर्ट ने भगोड़ा करार दे दिया है। बैंस की पार्टी ने इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन किया है। बलात्कार का मामला एक साल पुराना है। आरोपी बनाए गए सिमरजीत सिंह कोर्ट के बुलाने पर एक बार भी नहीं गए। उनके खिलाफ पहले जमानत और फिर गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। अब कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। 

बैंस के नजदीक सुखविंदर सिंह चीमा ने बताया कि 4 अगस्त को विधायक पर एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके साथ एक अक्टूबर तक कई बार दुष्कर्म हुआ है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को टालती रही। इस पर 15 जुलाई को अदालत में एक याचिका डालकर केस दर्ज करने की मांग की गई। अदालत ने पुलिस को 15 जुलाई तक इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा। 12 जुलाई को बैंस और 6 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो गया। 

इसलिए मामले पर उठ रहे सवाल 
इस मामले की जांच लुधियाना में चल रही थी, इसी बीच एक और महिला ने बैंस पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगा दिए। पुलिस ने उसकी शिकायत पर भी जांच शुरू कर दी। अभी जांच चल ही रही थी कि इस महिला ने अपनी शिकायत वापस ले ली। उसने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेसी नेता कड़वल और शिरोमणि अकाली दल के नेता के दबाव में उसने शिकायत दी थी। सुखविंदर चीमा का कहना है कि विधायक को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। 

निर्दलीय चुनाव जीते थे बैंस बंधु 
लुधियाना में बलविंदर सिंह बैंस और सिमरजीत सिंह बैंस 2012 में लुधियाना दक्षिण और आत्म नगर से चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में वे जीत गए। उन्होंने 2017 में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करते हुए पांच सीट पर चुनाव लड़ा। दोनों भाई फिर से जीत गए। इस बार उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन किया और तीन सीट लुधियाना साउथ, आत्म नगर और गिल हल्का देने की मांग की है। भाजपा के साथ गठबंधन हो गया है। 

रेत माइनिंग और भ्रष्टाचार पर मुखर है बैंस बंधु
दोनों भाइयों का पंजाब की राजनीति में एक अलग ही पहचान है। उन्होंने सबसे पहले रेत माइनिंग का मामला अकाली सरकार में उठाते हुए कई नेताओं को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया था। इनके विरोध का परिणाम यह रहा कि रेत खनन का मामला पंजाब की राजनीति में सबसे बड़े मुद्दों में एक बन गया। बाद में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू ने भी इस मामले को उठाया। लेकिन जिस तरह से इन दोनों भाइयों ने मामला उठाया था, उससे पूरे पंजाब में रेत चर्चा का विषय बन गया था। पहली बार रेत से होने वाली काली कमाई का आम पंजाबी को पता चला था। 

कार्रवाई के पीछे क्या राजनीति है?
वरिष्ठ पत्रकार हरपाल सिंह गिल का मानना है कि हालांकि ये कार्रवाई अदालत ने की है। लेकिन जब से चन्नी के रिश्तेदारों पर ईडी की रेड लगी है तब से कांग्रेस भाजपा को घेरने के लिए मौका खोज रही है। इसलिए बैंस बंधुओं के खिलाफ मामले को उछाल कर ईडी की रेड से मतदाता का ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। यह कोशिश हो सकती है, पर इसके ज्यादा लाभ कांग्रेस को मिलने वाला नहीं है। क्योंकि एक तो कांग्रेस पंजाब में पहले ही अपनी गुटबाजी का शिकार है। चन्नी के बचाव में दो तीन मंत्री ही सामने आए हैं। प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू चुप हैं। मामले को उठाकर मतदाता के बीच तक लेकर जाने के लिए एकजुटता चाहिए। जो कांग्रेस के पास नहीं है। दूसरी वजह यह है कि बैंस बंधुओं का लुधियाना में ठीकठाक होल्ड है। यह विवाद कम से कम राजनीतिक तौर पर उनके नुकसान शायद ही पहुंचा पाए।

चन्नी के रिश्तेदार के ठिकाने पर ईडी ने मारी थी रेड
बता दें कि इसी सप्ताह पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के रिश्तेदार के ठिकानों पर ईडी ने रेड मारी है। इस घटना के बाद कांग्रेस बैकफुट पर है। पार्टी चाह कर भी इसका जवाब मतदाताओं को नहीं दे पा रही है। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि ईडी की कार्रवाई सीएम को बदनाम करने और दबाने के लिए की गई है।

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