हर देश के पास अपना स्वर्ण भंडार होता है। यह किसी भी देश के केंद्रीय बैंक के पास रखा गया वह सोना होता है, जो आर्थिक संकट के समय काम आता है। यह देश की मुद्रा की रक्षा और जरूरत पड़ने पर लोगों के धन की वापसी के लिहाज से केंद्रीय बैंक खरीदकर रखता है। भारत में रिजर्व बैंक यह काम करता है। इस भंडार की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त होती है। 

लखनऊ (Uttar Pradesh)। हर देश के पास अपना स्वर्ण भंडार होता है। यह किसी भी देश के केंद्रीय बैंक के पास रखा गया वह सोना होता है, जो आर्थिक संकट के समय काम आता है। यह देश की मुद्रा की रक्षा और जरूरत पड़ने पर लोगों के धन की वापसी के लिहाज से केंद्रीय बैंक खरीदकर रखता है। भारत में रिजर्व बैंक यह काम करता है। इस भंडार की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त होती है। ऐसे में हम आपको बता दें कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित विश्व स्वर्ण काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में भारत नौवें स्थान पर हैं, लेकिन अब सोनभद्र के सोन पहाड़ी में करीब 2700 टन सोना और हरदी क्षेत्र में 646.15 टन सोने का भंडार होने की भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय ने पुष्टि की है। यदि इसे मिला लें तो इस मामले में भारत दूसरे स्थान पर पहुंच जाएगा, क्योंकि भारत के बाद 3964.15 टन सोना होगा।

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किस देश के पास कितना सोना
विश्व स्वर्ण काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के पास दुनिया में सबसे अधिक 8,133.5 टन गोल्ड रिजर्व है। इसके बाद जर्मनी के पास 3,366 टन और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास 2,814 टन है, इटली 2,451.8 टन, फ्रांस 2436 टन, रूस 2,241.9 टन, चीन 1,948.3 टन, स्विट्जरलैंड 1,040 टन और जापान के पास 765.2 टन का भंडार है, जबकि भारत के पास 618 टन सोना है, लेकिन सोनभद्र के सोने को मिला तो भारत विश्व का दूसरा देश बन जाएगा। 

भारत में इन स्थानों पर हैं सोने की खानें
भारत में सबसे ज्यादा सोना कर्नाटक की हुत्ती खदान से निकाला जाता है। इस लिहाज से भारत में कर्नाटक सोने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसके बाद आंध्रप्रदेश दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इनके अलावा झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश में भी सोना की छोटी-बड़ी खदानें और अब सोनभद्र में सोने की दो खदान मिलीं हैं।

सोना निकालने से ये होता है लाभ
सोनभद्र में मिले विशाल सोने की खान और अन्य खनिजों की खोज से उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व को बढ़ेगा। इसके साथ ही यह खान कुशल और अकुशल दोनों तरह के रोजगार प्रदान करने के अलावा, इन पिछड़े क्षेत्रों के जरूरी विकास को भी आगे बढ़ाने वाली होगी।