वेदांता ग्रुप के फाउंडर अनिल अग्रवाल बिहार के पटना की एक छोटी सी गली से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मेटल बिजनेस में अपनी पहचान बनाई। उनकी कंपनी का मार्केट कैप 2.31 लाख करोड़ है।
अनिल अग्रवाल का जन्म पटना में 1954 में हुआ। उनके पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल पटना में एल्युमिनियम कंडक्टर की छोटी सी दुकान चलाते थे। अनिल चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।
घर की इनकम ज्यादा नहीं थी। बड़े होने के नाते अनिल अग्रवाल ने शुरुआत में परिवार की जिम्मेदारी उठाई। सरकारी स्कूल में पढ़न के बाद वह पिता के काम में हाथ बंटाने लगे।
19 साल की उम्र में अनिल मुंबई आ गए। पास में सिर्फ टिफिन और बिस्तर था। उन्होंने अलग-अलग छोटे-छोटे बिजनेस शुरू किए। इनमें से 9 बिजनेस फेल हुए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
अनिल ने खुद बताया कि शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते। 1976 में उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज की नींव रखी। शुरूआत में ही इस बिजनेस में फायदा हुआ और फिर दूसरी कंपनियों में निवेश किया।
अनिल अग्रवाल ने 1993 में औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स का प्लांट लगाया। इसके बाद वेदांता भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई।
2003 में अनिल अग्रवाल ने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया। पहली बार कोई भारतीय कंपनी लंदन में लिस्ट हुई। फिर वेदांता ग्लोबल मेटल मार्केट में प्रमुख बन गई।
आज वेदांता ग्रुप के बिजनेस में जिंक, लेड, एल्युमिनियम, सिल्वर और कई अन्य मेटल्स शामिल हैं। भारत के अलावा, कंपनी की ऑपरेशन दक्षिण अफ्रीका, लाइबेरिया और नामीबिया में भी हैं।
फोर्ब्स जुलाई 2025 के अनुसार, मेटल मैन अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति 3.3 बिलियन डॉलर यानी 29 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। वे देश के 16वें सबसे ज्यादा अमीर हैं।