आज के ज्यादातर छात्र पढ़ाई शुरू करने के लिए परफेक्ट टाइम का इंतजार करते रहते हैं, जबकि खान सर कहते हैं, ऐसा समय होता ही नहीं, किताब खोलते ही सही समय शुरू हो जाता है।
खान सर का मानना है अगर आप सच में मेहनत कर रहे हैं, तो आपको अंदाजा हो जाता है कि रिजल्ट कैसा आएगा। और अगर अंदाजा नहीं है, तो समझिए मेहनत में कमी रह गई है। इसलिए ईमानदारी से पढ़ें।
सच ये है कि मोटिवेशन कुछ समय के लिए ही रहता है। असली गेम डिसिप्लिन का है। रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ना शुरू करें, चाहे 20 मिनट ही क्यों न हो। शुरुआत कर ली, तो आधी जीत वैसे ही हो जाती है।
खान सर कहते हैं कि समझ नहीं आया, तो पढ़ाई बेकार। सवाल पूछें, बार-बार पढ़ें, विजुअल तरीके से समझने की कोशिश करें। कन्फ्यूजन होना कमजोरी नहीं, बल्कि दिमाग के एक्टिव होने का संकेत है।
कोई आपसे ज्यादा पढ़ेगा, कोई ज्यादा नंबर लाएगा, इसका मतलब ये नहीं कि आप कमजोर हैं। अपनी प्रोग्रेस पर ध्यान दें, दूसरों से तुलना करके खुद का कॉन्फिडेंस गिराने की जरूरत नहीं है।
लगातार 8-10 घंटे पढ़ना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इससे दिमाग थक जाता है। बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें, थोड़ा टहलें, पानी पिएं, इससे फोकस बेहतर रहता है और पढ़ाई असरदार होती है।
एग्जाम के पहले कई स्टूडेंट्स नींद छोड़कर पढ़ाई करते हैं, लेकिन इससे दिमाग सही से काम नहीं करता। आप रोज का प्लान सही रखें, तो आखिरी समय में ओवरलोड नहीं होगा और नींद भी पूरी मिलेगी।
खान सर साफ कहते हैं, फेल होना ये तय नहीं करता कि आप क्या बन सकते हैं। ये सिर्फ एक स्टेप है, जिससे सीखकर आगे बढ़ना जरूरी है।