सर्दियों में उत्तराखंड जाने की सोच रहे हैं तो घूमने-फिरने के साथ लिस्ट में ऐसे 5 फूलों को भी रखें, जो देवभूमी और हिमालयी रीजन के अलावा कहीं भी नहीं पाएं जाते हैं।
ब्रह्मा कमल 45000 मीटर ऊंचाई क्षेत्रों में पाया जाता है। ये साल में केवल एक बार ही खिलता है। सफेद मोम जैसे फूल को देखने हर साल सैकेड़ों पर्यटक आते हैं। आप इसका दीदार जरूर करें।
ब्लू पॉपी को पर्वतों का नीलम कहा जाता है। ये 3000-5000 मीटर की ऊचाई पर ठंड चट्टानी जमीन पर खिलता है। आप इसे वैली ऑफ फ्लावर्स में इसका दीदार कर सकते हैं। ये दुर्लभ फूल माना जाता है
ये फ्लावर फ्लांट कोबरा के फन जैसा फूल आता है। ये उत्तराखंड और हिमालयी रीजन के घने जंगलों में 2000-3000मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। ये फूल दिखने में जितना सुंदर है उतना खतरनाक भी।
बुरांश वसंत के मौसम में उत्तराखंड को रंग देता है। आप इसे कुमाऊं या गढ़वाल क्षेत्रों में देख सकते हैं। इसकी खासियत है कि ये जैसे-जैसे पुराना होता है रंग गुलाबी और सफेद हो जाता है।
ये दुर्लभ अल्पाइन फूल है, जिसे फेम कमल भी कहा जाता है। ये 5000-6000 मीटर की ऊंचाई पर उगता है। ये बिल्कुल सफेद बर्फ जैसा लगता है। इसे ऊंचे ट्रैकिंग रास्तों के पास देखा जा सकता है।
भले, ये सभी फूल उत्तराखंड से जुड़े हैं लेकिन आप इसे हिमालय क्षेत्र में देख सकते हैं। हालांकि Poa Rhadina नामक घास प्रजाति केवल उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में पाई जाती है।
देवभूमि में अल्पाइन, समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय जलवायु मिलती है। ऐसे में भारत के कुल पौधों की 25% प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। आप भी इनका दीदार कर लाइफटाइम एक्सपीरियंस पा सकते हैं।