सिस्टर शिवानी ने बताया कि सच्चा प्रेम निःस्वार्थ होता है, इसमें किसी भी तरह की अपेक्षा नहीं होती।
जब हम शांति का प्रसार करते हैं, तो हमारे सभी रिश्ते अपने आप मजबूत हो जाते हैं।
प्रेम को बाहर मत खोजिए, पहले उसे अपने भीतर पैदा कीजिए और फिर बांटिए।
जब आत्मा स्वस्थ होती है, तो प्रेम स्वतः ही प्रवाहित होने लगता है।
प्रेम का अर्थ नियंत्रण नहीं, बल्कि स्वीकार करना है। जैसा आपका पार्टरन या फिर कोई है, उसे वैसे ही स्वीकार करो।
रिश्ता तब आगे बढ़ता है, जब हम मांगने के बजाय देना सीखते हैं।
प्रेम से बोले गए शब्दों में घाव भरने की अद्भुत शक्ति होती है।
विश्वास और समझ ही सच्चे प्रेम की नींव होते हैं। रिश्ते में यह जरूर रखें।
जहां अहंकार खत्म होता है, वहीं से प्रेम की शुरुआत होती है।
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