National

कहीं भी करा सकेंगे FIR, भगौड़ों की बढ़ेगी मुसीबत, 1 जुलाई से नया कानून

Image credits: FREEPIK

1 जुलाई से नए क्रिमिनल लॉ

1 जुलाई, 2024 से देश में नया क्रिमिनल लॉ लागू हो जाएगा। IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता, CRPC की जगह भारतीय सुरक्षा संहिता और इंडियन एविडेंस की जगह भारतीय साक्ष्य संहिता हो जाएगी।

Image credits: FREEPIK

नए क्रिमिनल लॉ से क्या-क्या बदल जाएगा

3 नए क्रिमिनल लॉ लागू होने से काफी कुछ बदल जाएगा। देश में कहीं भी जीरो FIR दर्ज होंगे। कुछ मामलों में गिरफ्तारी से पहले मंजूरी लेनी होगी। कुछ मामलों में ही हथकड़ी लगाई जा सकेगी।

Image credits: unsplash.com

देश में कहीं भी जीरो FIR

नए क्रिमिनल लॉ से देश में कहीं भी जीरो FIR करवा सकेंगे। इसमें धाराएं जुड़ेंगी। 15 दिन में FIR संबंधित थाने भेजनी होगी। हर थाने पर ऐसा पुलिस अफसर होगा, जिस पर इसकी जिम्मेदारी होगी

Image credits: freepik

पुलिस को 90 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

पुलिस को किसी केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट 90 दिनों में देनी होगी। 180 दिन में जांच पूरी कर ट्रायल करना होगा। अदालत 60 दिन में आरोप तय और 30 दिन में फैसला देगा, 7 दिन में सजा का ऐलान।

Image credits: FREEPIK

गिरफ्तारी का नियम कितना बदलेगा

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 में नया सब सेक्शन 7 जोड़ा गया है। जिसमें 3 साल या उससे कम सजा वाले अपराध में गिरफ्तारी से पहले DSP या ऊपर अफसरों की अनुमति लेनी होगी।

Image credits: freepik

पुलिस कस्टडी को लेकर नियम

नए कानून में गिरफ्तारी की तारीख से ज्यादा से ज्यादा 15 दिनों तक ही कस्टडी में रख सकती है। पुलिस कोर्ट में गिरफ्तारी के 60 से 90 दिन में किसी भी समय 15 दिन की कस्टडी मांग सकती है।

Image credits: freepik

हथकड़ी को लेकर नियम

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 43 (3) में गिरफ्तारी या कोर्ट में पेशी के समय कैदी को हथकड़ी लगाया जा सकते है। आतंकी, ड्रग्स, मानव तस्करी जैसे अपराधों में हथकड़ी लगाया जा सकता है

Image credits: freepik

भगोड़े अपराधियों पर केस

नए कानून में फरार अपराधियों पर भी केस चलेगा। आरोप तय होने के 90 दिन बाद भी आरोपी अदालत नहीं आता तो ट्रायल शुरू होगा। कोर्ट मान लेगी कि उसने निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार छोड़ दिए हैं।

Image credits: freepik

दया याचिका का कानून भी बदला

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 472 (1) में के तहत, कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद 30 दिन में राष्ट्रपति को दया याचिका दायर करनी होगी। राष्ट्रपति का फैसला 48 घंटे में आ जाएगा।

Image credits: freepik