चैत्र नवरात्रि का पर्व 30 मार्च से 6 अप्रैल तक मनाया जाएगा। इस नवरात्रि में पूजा से जुड़े अनेक नियम बताए गए हैं। इन बातों का सभी को ध्यान रखना चाहिए। जानें इन नियमों के बारे में…
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को देवताओं की दिशा माना गया है। इसी दिशा में माता की प्रतिमा व कलश स्थापना करना चाहिए।
कलश स्थापना के साथ ही अखंड ज्योति भी जलाई जाती है। यदि आप भी माता प्रतिमा के सामने अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इसे आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रखें।
नवरात्रि में देवी की पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। कलश स्थापना के लिए चंदन के बाजोट (पटिए) का उपयोग करें तो बहुत ही शुभ फल मिलता है।
जहां भी आप माता की चौकी की स्थापना करें उसके आस-पास शौचालय या बाथरूम नहीं होना चाहिए। पूजा स्थल के सामने खुला स्थान होना चाहिए जहां आसानी से बैठा जा सके।
कई लोग चैत्र नवरात्रि के मौके पर अपने घरों पर केसरिया ध्वज भी लगाते हैं। ध्वजा की स्थापना घर की छत पर वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में करना चाहिए। ऐसा करना शुभ होता है।