अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार को बेदखल करने के बाद मुहम्मद यूनुस को बांग्लादेश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया। तब से अब तक 7 महीने में वहां अराजकता बढ़ती जा रही है।
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से अब तक 140 कपड़ा फैक्ट्रियों में ताले लग चुके हैं।
बांग्लादेश का गारमेंट सेक्टर इस वक्त भयंकर संकट से जूझ रहा है। कपड़ा फैक्ट्रियां बंद होने से अब तक 1 लाख से ज्यादा मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं।
बांग्लादेश के गाजीपुर, नर्सिंदी, सावर और नारायणगंज में ही 50 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर ताले लग चुके हैं। इसके अलावा और भी कई जिलों में हालात बदतर हैं।
कई कपड़ा फैक्ट्रियों में मजदूरों को 2 महीने से लेकर सवा साल तक का वेतन नहीं मिला है। इसके चलते मजदूर सड़कों पर विरोध कर रहे हैं।
जैसे-जैसे ईद नजदीक आ रही है, बांग्लादेश में हालात और खराब होते जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ईद के बाद कई और गारमेंट कंपनियां बंद होने वाली हैं।
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सूत्रों के मुताबिक, 20% ऑर्डर भारत, वियतनाम, श्रीलंका, इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे देशों में शिफ्ट हो चुके हैं।
बंद हो रही ज्यादातर फैक्ट्रियां शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से जुड़े नेताओं की है। इनमें हसीना के विदेशी निवेश सलाहकार सलमान एफ. रहमान की बेक्सिमको कंपनी भी शामिल है।
बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों के अचानक बंद होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक मंदी व राजनीतिक अस्थिरता को माना जा रहा है।