अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में आने के एक घंटे के भीतर ही अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का ऐलान कर दिया। वह तीन दिन के लिए यहां आए हैं।

संयुक्त राष्ट्र. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में आने के एक घंटे के भीतर ही अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का ऐलान कर दिया। वह तीन दिन के लिए यहां आए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से अधिक वह धार्मिक उत्पीड़न पर फोकस करेंगे।

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सबसे अहम है जलवायु परिवर्तन का मुद्दा 
इस साल संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रमों में जलवायु शिखर सम्मेलन सबसे अहम है, लेकिन वह ट्रंप के एजेंडे में कहीं नहीं था। इसकी जगह उन्होंने एक धार्मिक आजादी की रक्षा को लेकर एक बैठक को अधिक अहमियत दी। ट्रंप ने कहा कि वैश्विक नेताओं के लिए एक “तात्कालिक नैतिक कर्तव्य” है कि वे धार्मिक मतों के खिलाफ अपराध रोकें और धार्मिक आजादी को रोकने वाले कानूनों को खत्म करें।

दुनिया की 80% आबादी को नहीं है धार्मिक आजादी 
ट्रंप ने कहा, “दुनिया की लगभग 80% आबादी ऐसी जगह पर रहती है जहां धार्मिक आजादी खतरे में है, उस पर रोक है या पूरी तरह प्रतिबंधित है।” साथ ही उन्होंने कहा कि जब उन्हें पहली बार ये आंकड़े पता चले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने दोबारा उनकी जांच करने के लिए कहा। सोमवार को ट्रंप के भाषण से अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर एक बार फिर फोकस हो गया है।

धार्मिक आजादी को लेकर बनेगा अंतर्रष्ट्रीय गठबंधन 
उनकी सरकार इस विषय पर वाशिंगटन में एक वार्षिक बैठक का आयोजन करती है और अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि इस साल की बैठक में इस मुद्दे पर समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाएगा।

(यह खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की है। एशियानेट हिंदी की टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)