रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हटा दिया गया है। रूस को हटाने संबंधी प्रस्ताव पर वोटिंग में भारत ने हिस्सा नहीं लिया। प्रस्ताव के पक्ष में 93 देशों ने वोट दिया।

न्यूयॉर्क। यूक्रेन के खिलाफ जंग के चलते रूस को संयुक्त राष्ट्र की संस्था संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council) से बाहर कर दिया गया है। रूस को UNHRC से सस्पेंड करने के प्रस्ताव पर गुरुवार को वोटिंग हुई। भारत ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। रूस के खिलाफ वोटिंग में 93 देशों ने हिस्सा लिया। भारत समेत 58 देश वोटिंग में शामिल नहीं हुए। 24 देशों ने रूस का साथ दिया। 

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निलंबन का समर्थन करने वाले देशों में अमेरिका, यूरोपीय संघ के राष्ट्र, यूके और यूक्रेन थे। प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वालों में चीन, सीरिया और बेलारूस शामिल थे। भारत, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका उन राष्ट्रों में से थे, जिन्होंने मतदान से परहेज किया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि हम बिगड़ती स्थिति पर गहराई से चिंतित रहना जारी रखते हैं और सभी शत्रुताओं को समाप्त करने के अपने आह्वान को दोहराते हैं। जब निर्दोष मानव जीवन दांव पर हो तो कूटनीति को ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प के रूप में प्रबल होना चाहिए। 

बुचा नरसंहार की जांच की मांग
टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि संकट के प्रभाव को क्षेत्र से परे भी महसूस किया गया है। कई विकासशील देशों के लिए खाद्य और ऊर्जा लागत में वृद्धि हुई है। संघर्ष के शीघ्र समाधान की दिशा में संयुक्त राष्ट्र के भीतर और बाहर रचनात्मक रूप से काम करना हमारे सामूहिक हित में है। बुचा में नागरिकों की हत्याओं की हालिया रिपोर्टें बहुत परेशान करने वाली हैं। हमने इन हत्याओं की स्पष्ट रूप से निंदा की है और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन करते हैं।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के आपातकालीन विशेष सत्र में रूस को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हटाने पर मतदान हुआ। यूएनजीए के आपातकालीन सत्र में यूएन के लिए यूक्रेन के प्रतिनिधि ने कहा कि यूएनएचआरसी में रूसी संघ की सदस्यता के अधिकारों का निलंबन एक विकल्प नहीं है, बल्कि एक कर्तव्य है।

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