हमारे देश में अलग-अलग नामों से भगवान विष्णु के अनेक मंदिर है। ऐसा ही एक मंदिर दक्षिण भारत के आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) के चित्तूर (Chittoor) जिले की तिरुपति (Tirupati) में तिरुमाला (Tirumala) की पहाड़ी पर स्थित है। ये मंदिर तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर की कई बातें इसे खास बनाती हैं। 

उज्जैन. तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) को देश का सबसे धनी मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर की कई परंपराएं हैं, जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इस मंदिर की पहाड़ी पर सात चोटियां होने से इसे सात पहाडिय़ों का मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर में प्रतिदिन लगभग 50 हजार से 1 लाख भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दो साल बाद तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने 20 मार्च, रविवार को ऑनलाइन मोड के माध्यम से अरिजीत सेवा टिकट जारी किया। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…

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1. खुद प्रकट हुई थीं यहां की मूर्ति
मान्यता है कि यहां मंदिर में स्थापित काले रंग की दिव्य मूर्ति किसी ने बनाई नहीं बल्कि वह खुद ही जमीन से प्रकट हुई थी। स्वयं प्रकट होने की वजह से इसकी बहुत मान्यता है। वेंकटाचल पर्वत को लोग भगवान का ही स्वरूप मानते है और इसलिए उस पर जूते लेकर नहीं जाया जाता।

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2. इसलिए किया जाता है यहां बालों का दान
मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने मन से सभी पाप और बुराइयों को यहां छोड़ जाता है, उसके सभी दुख देवी लक्ष्मी खत्म कर देती हैं। इसलिए यहां अपनी सभी बुराइयों और पापों के रूप में लोग अपने बाल छोड़ जाते है। ताकी भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी उन पर प्रसन्न हों और उन पर हमेशा धन-धान्य की कृपा बनी रहे।

3. क्यों कहते हैं भगवान विष्णु को वेंकटेश्वर
इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि यह मेरूपर्वत के सप्त शिखरों पर बना हुआ है, जो की भगवान शेषनाग का प्रतीक माना जाता है। इस पर्वत को शेषांचल भी कहते हैं। इसकी सात चोटियां शेषनाग के सात फनों का प्रतीक कही जाती है। इन चोटियों को शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरुड़ाद्रि, अंजनाद्रि, वृषटाद्रि, नारायणाद्रि और वेंकटाद्रि कहा जाता है। इनमें से वेंकटाद्रि नाम की चोटी पर भगवान विष्णु विराजित हैं और इसी वजह से उन्हें वेंकटेश्वर के नाम से जाना जाता है।

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