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चाणक्य नीति: इन परिस्थितियों में मित्र, पत्नी और शिष्य का न होना ही बेहतर रहता है

आचार्य चाणक्य तीक्ष्ण बुद्धि के धनी थे। इन्हें विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता था। आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) को कूटनीति, राजनीति और अर्थशास्त्र में महारत हासिल थी। इनके द्वारा लिखित नीति शास्त्र की बातें मनुष्य के जीवन को बहुत ही करीब से स्पर्श करती हैं।
 

Chanakya Niti, situations where its better not to have friend, wife and student
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Ujjain, First Published Sep 29, 2021, 6:30 AM IST
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उज्जैन. चाणक्य नीति की बातें लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में कुछ ऐसी परिस्थितियों के बारे में वर्णन किया है जिनमें राजा, मित्र और शिष्य न होना ही बेहतर होता है। आगे जानिए इन परिस्थितियों के बारे में…

ऐसा मित्र नहीं होना चाहिए (Chanakya Niti)

हर व्यक्ति के जीवन में बहुत से मित्र होते हैं। यदि देखा जाए तो व्यक्ति के जीवन में एक अच्छा मित्र बहुत आवश्यक होता है क्योंकि मित्र से व्यक्ति रह विषय पर खुलकर बात कर सकता है लेकिन आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक पापी का मित्र होने से बेहतर है कि मनुष्य बिना मित्र का हो। पापी मित्र स्वयं के साथ आपको भी परेशानियों में डाल देता है, इसलिए भले ही जीवन में कम मित्र बनाने चाहिए लेकिन अच्छे चरित्र के बनाने चाहिए। 

न बनें मूर्ख के गुरु
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक मूर्ख का गुरु होने से बेहतर है कि वह बिना शिष्य वाला हो। कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख व्यक्ति को यदि ज्ञान दिया जाए तो वह अपने कुतर्को के आगे उसे समझना ही नहीं चाहता है इसलिए ऐसे मुर्ख व्यक्ति को ज्ञान देना केवल बहुमूल्य समय को नष्ट करना होता है।

ऐसी पत्नी से बचकर रहें (Chanakya Niti)
जहां एक धर्म परायण स्त्री अपने पति और परिवार का मान सम्मान बढ़ाती है और उसके जीवन को सुखी बनाती है तो वहीं एक बुरी पत्नी के कारण व्यक्ति के जीवन के सभी सुखों और मान सम्मान का नाश हो जाता है इसलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक बुरी पत्नी होने से बेहतर है कि व्यक्ति बिना पत्नी वाला हो।

न बनें ऐसे देश के राजा
यदि किसी को राजा बनने का अवसर मिले तो हर व्यक्ति चाहता है कि वह राजा बने। किसी राज्य का राजा होना स्वयं में गर्व की बात है लेकिन नीति शास्त्र में बताया गई परिस्थिति के अनुसार राजा न होना ही सही रहता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक बेकार राज्य का राजा होने से यह बेहतर है कि व्यक्ति किसी राज्य का राजा न हो। ...

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