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परम ज्ञानी होने के बाद भी रावण में ये 4 अवगुण थे, इनकी वजह से उसका सर्वनाश हुआ

रावण को अधर्म और बुराइयों का प्रतीक माना जाता है। वह जन्म से ब्राह्मण था और वह सभी शास्त्रों का जानकार भी था। ज्योतिष और पूजा-पाठ के सभी नियमों की भी जानकारी उसे थी।

Ravana was knowledgeable, but he had four demerits which destroyed him KPI
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Ujjain, First Published Apr 15, 2020, 2:49 PM IST
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उज्जैन. इन अच्छी बातों के अलावा रावण में बुराइयां काफी अधिक थीं। बुराइयों के कारण ही उसकी सभी अच्छाइयों का महत्व खत्म हो गया। रावण बहुत शक्तिशाली था, लेकिन उसने 4 गलतियां ऐसी की, जिनसे वह मारा गया। ये चार गलतियां कौन-कौन सी हैं, यहां जानिए...

1. सही सलाह न मानना
रावण की एक गलती ये थी कि वह कभी भी सही सलाह नहीं मानता था। मंदोदरी, विभीषण, माल्यवान, कुंभकर्ण, हनुमान आदि ने रावण को सलाह दी थी कि वह श्रीराम से शत्रुता न करें और सीता को पुन: लौटा दे, लेकिन रावण ने ये बात नहीं मानी। इस गलती के कारण रावण का अंत हुआ।

2. स्त्री का सम्मान नहीं करना
रावण स्त्रियों का सम्मान नहीं करता था, उन्हें सिर्फ भोग-विलास की वस्तु समझता था। रावण ने कई स्त्रियों के साथ बल प्रयोग किया था, जिसके कारण उसे कई श्राप भी मिले थे। यही श्राप उसके अंत का कारण भी बने। जो लोग स्त्रियों का सम्मान नहीं करते हैं, उन्हें दुखों का सामना करना पड़ता है। इस एक बुराई के कारण दूसरी सभी अच्छाइयों का महत्व खत्म हो जाता है।

3. घमंड करना
रावण को अपनी शक्तियों पर इतना अधिक भरोसा था कि वो बिना सोचे-समझे ही किसी को भी युद्ध के लिए ललकार देता था। शक्तियों के घमंड के कारण ही रावण ने सीता का भी हरण किया और श्रीराम से युद्ध करने के लिए तैयार हो गया। खुद की शक्ति पर विश्वास होना अच्छी बात है, लेकिन शत्रु को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए।

4. सिर्फ खुद की तारीफ सुनना
रावण की यह भी एक बुरी आदत थी कि वह सिर्फ खुद की तारीफ ही सुनता था। रावण के सामने जो भी उसके शत्रु की प्रशंसा करता था वह उसे दंड देता था। जो लोग चापलूसों से घिरे रहते हैं और सच बोलने वालों को नापसंद करते हैं, वे कई बार परेशानियों का सामना करते हैं। हमें चापलूसों से बचना चाहिए।

 
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