Bhogi Pongal 2023: 4 दिनों तक मनाते हैं पोंगल, पहले दिन को कहते हैं भोगी, जानें क्या-क्या होता है इस दिन?

Published : Jan 14, 2023, 08:52 AM IST
Bhogi Pongal 2023: 4 दिनों तक मनाते हैं पोंगल, पहले दिन को कहते हैं भोगी, जानें क्या-क्या होता है इस दिन?

सार

Bhogi Pongal 2023: हमारे देश भारत में एक ही त्योहार कई नामों से मनाया जाता है। ऐसा ही एक त्योहार है मकर संक्रांति। ये त्योहार भारत के हर हिस्से में विभिन्न नामों और अपनी अलग परंपराओं के कारण जाना जाता है। इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी, रविवार को है।  

उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जैसे ही सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है तो देवताओं का दिन शुरू हो जाता है। इस खुशी के मौके पर मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2023) का पर्व मनाया जाता है। पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में तो गुजरात में उत्तरायण के रूप में मनाते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। पोंगल (Bhogi Pongal 2023) का त्योहार लगातार 4 दिनों तक चलता है। इसके पहले दिन को भोगी कहते हैं। इस दिन कई परंपराओं का पालन किया जाता है। आगे जानिए पोंगल से जुड़ी कुछ खास बातें… 

पोंगल में 4 दिनों में क्या-क्या होता है? (What happens during the 4 days of Pongal?)
पोंगल उत्सव लगातार 4 दिनों तक मनाया जाता है। इस बार ये 15 से 18 जनवरी तक मनाया जाएगा। पोंगल के पहले दिन को भोगी कहते हैं, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और अंतिम दिन को कानुम पोंगल कहते हैं। इन चारों दिन अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। पोंगल के पहले दिन से तमिल का नववर्ष आरंभ होना माना जाता है। इसलिए भी ये उत्सव बहुत महत्वपूर्ण है।

जानें भोगी पोंगल का महत्व (importance of Bhogi Pongal)
दक्षिण भारत में पोंगल के पहले दिन को भोगी कहते हैं। ये दिन भगवान इंद्र को समर्पित रहता है, इसलिए इसे इंद्र पोंगल भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन इंद्रदेवता की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ऐसी मान्यता है कि पोंगल के मौके पर इंद्रदेव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और खुशहाली घर आती है। इस दिन ही तमिल के नये वर्ष की शुरुआत होती है।

क्या किया जाता है भोगी पोंगल पर? (Traditions of Bhogi Pongal)
पोंगल के पहले दिन यानी भोगी पर सभी लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और घर का साला अनुपयोगी सामान बाहर कर देते हैं। यानी घर में कोई भी बेकार चीज न रह जाए इसका ध्यान रखा जाता है। इसके बाद चावल का पीसकर पेस्ट बनाया जाता है, जिससे घर को सजाया जाता है। घर के मुख्य दरवाजे पर पर कोलम (एक विशेष प्रकार की रांगोली) बनाई जाती है। शाम को सभी लोग इकट्ठा होकर एक विशेष वाद्य यंत्र जिसे भोगी कोट्टम कहते हैं बजाते हैं और लोकगीत गाकर एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं।


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