हिंदू कैलेंडर की पहली नवरात्रि 2 अप्रैल से, क्या आप जानते हैं साल में कितनी बार आती है नवरात्रि?

Published : Mar 28, 2022, 06:20 PM IST
हिंदू कैलेंडर की पहली नवरात्रि 2 अप्रैल से, क्या आप जानते हैं साल में कितनी बार आती है नवरात्रि?

सार

इस बार चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2022) की शुरूआत 2 अप्रैल, शनिवार से हो रही है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष का भी आरंभ होगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, एक साल में 4 नवरात्रि होती है। इनमे से 2 गुप्त और 2 प्रकट नवरात्रि होती है।

उज्जैन. गुप्त नवरात्रि में वामाचार यानी तंत्र-मंत्र के माध्यम से देवी की उपासना की जाती है, वहीं प्रकट नवरात्रि में सात्विक तरीके से देवी मां की पूजा का विधान है। इन चारों नवरात्रि के दौरान देवी के अलग-अलग रूपों के अलावा 10 महाविद्याओं की भी पूजा की जाती है। ऐसा करने से हर मनोकामना पूरी होती है, ऐसी मान्यता है। खास बात ये है कि ये चारों नवरात्रि ऋतुओं के संधिकाल के समय आती हैं। आगे जानिए साल में कब-कब आती है नवरात्रि…

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जानिए हिंदू कैलेंडर के अनुसार नवरात्रि का समय…
- हिंदू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। वर्ष के प्रथम मास अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है। इसके बाद अश्विन मास में प्रमुख नवरात्रि होती है। 
- इसी प्रकार वर्ष के ग्यारहवें महीने अर्थात माघ में भी गुप्त नवरात्रि मनाने का उल्लेख एवं विधान देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
- अश्विन मास की नवरात्रि सबसे प्रमुख मानी जाती है। इस दौरान गरबों के माध्यम से माता की आराधना की जाती है। दूसरी प्रमुख नवरात्रि चैत्र मास की होती है। इन दोनों नवरात्रियों को क्रमश: शारदीय व वासंती नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें प्रकट नवरात्रि भी कहते हैं। 
- इसके अतिरिक्त आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्रि गुप्त रहती है। इसके बारे में अधिक लोगों को जानकारी नहीं होती, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्रि कहते हैं।

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ऋतुओं के संधिकाल में ही क्यों आती है नवरात्रि?
- चैत्र नवरात्रि का समय ठंड के खत्म होने का और गर्मी शुरू होने का रहता है। आश्विन मास की नवरात्रि के समय वर्षा ऋतु खत्म होती है और शीत ऋतु शुरू होती है। मौसम परिवर्तन के समय इन नवरात्रि में किए गए व्रत-उपवास से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।
- नवरात्रि में निराहार रहना होता है यानी इन दिनों में व्रत किए जाते हैं, अन्न का त्याग करते हैं और फलों का सेवन किया जाता है। इस वजह से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और पेट संबंधी कई समस्याओं की रोकथाम हो सकती है।
 

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