Christmas 2022: कौन थे पहले सांता क्लॉज? जानें वो बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं

Published : Dec 21, 2022, 01:13 PM IST
Christmas 2022: कौन थे पहले सांता क्लॉज? जानें वो बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं

सार

Christmas 2022: ईसाई समुदाय के लोग हर साल 25 दिसंबर को प्रभु ईसा मसीह का जन्मदिवस बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। बच्चों को भी क्रिसमस का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि इस दिन सांता क्लॉज उन्हें गिफ्ट देने आते हैं।

उज्जैन. क्रिसमस (Christmas 2022) ईसाइयों का सबसे बड़ा फेस्टिवल है। दुनिया भर में जहां भी ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं, वहां वे इस त्योहार को बड़ी ही धूम-धाम से मनाते हैं। इस त्योहार से कई परंपराएं भी जुड़ी हैं जो इसे और भी खास बनाती है। ऐसी ही एक परंपरा है सांता क्लॉज (Santa Claus) की। सांता क्लॉज क्रिसमस पर बच्चों को गिफ्ट और टॉपियां देते हैं, ये बात तो सभी जानते हैं, लेकिन सांता क्लॉज कौन थे और ये परंपरा कैसी शुरू हुई, इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आगे जानिए इस परंपरा के बारे में…
 
संत निकोलस को माना जाता है पहला सांता क्लॉज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीसस की मौत के करीब 280 साल बाद संत निकोलस का जन्म हुआ। बचपन से ही उनकी प्रभु यीशु के प्रति गहरी आस्था थी। वे एक रईस परिवार के थे। बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। जब वे बड़े हुए तो ईसाई धर्म के पादरी और बाद में बिशप बने। बच्चों से उन्हें विशेष प्रेम थे। वे अक्सर जरूरतमंदों की मदद करते थे।

रात में करते थे लोगों की मदद
संत निकोलस अक्सर रात को रूप बदलकर लोगों की मदद करते थे ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। संत निकोलस को ही असली सांता और सांता का जनक माना जाता है, हालांकि संत निकोलस और जीसस के जन्म का सीधा संबंध नहीं रहा है फिर भी आज के समय में सांता क्लॉज क्रिसमस का अहम हिस्सा हैं।

सांता का आधुनिक स्वरूप
संत निकोलस की मृत्यु के बाद लोगो में सांता को लेकर कई तरह की बातें की जाने लगी। धीरे-धीरे ये बातें सामने आने लगी कि सांता का घर उत्तरी ध्रुव पर है और वे उड़ने वाले रेनडियर्स की गाड़ी पर चलते हैं। सांता का यह आधुनिक रूप 19 वीं सदी से अस्तित्व में आया। उसके पहले ये ऐसे नहीं थे। वर्तमान समय ममें भी सांता के बिना क्रिसमस अधूरा सा लगता है।

लाल कपड़े ही क्यों पहनते हैं सांता?
सांता क्लॉज को लाल कपड़ों में देखा जाता है। इसके पीछे का कारण है कि लाल रंग खुशी और प्यार का प्रतीक है। ये लोगों के प्यार और अपनत्न को दर्शाता है। प्रभु यीशु हर व्यक्ति से प्यार करते थे और उन्हें मानवता के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित करते थे। लाल रंग इन सभी बातों का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए सांता हमेशा लाल कपड़े ही पहनते हैं।


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