Mahakal Sawari Ujjain: बैलगाड़ी पर उमा-महेश स्वरूप में निकले महाकाल, दर्शन पाकर भक्त हुए निहाल

Published : Aug 08, 2022, 03:31 PM ISTUpdated : Aug 08, 2022, 07:53 PM IST
Mahakal Sawari Ujjain:  बैलगाड़ी पर उमा-महेश स्वरूप में निकले महाकाल, दर्शन पाकर भक्त हुए निहाल

सार

आज (8 अगस्त) श्रावण मास का अंतिम सोमवार है। इस मौके पर देश के सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिमुखी महाकालेश्वर का इस मौके पर खास श्रृंगार किया गया।

उज्जैन. 8 अगस्त, सोमवार तड़के 3 बजे मंत्रोच्चार के साथ जल से भगवान महाकाल को स्नान कराने के बाद दूध, दही, घी, शहद फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया। आज शाम को 4 बजे सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान महाकाल की चौथी सवारी (Mahakal Sawari Ujjain Today) निकलेगी। इसके बाद मंदिर में ही पंडितों द्वारा बाबा महाकाल का पूजन किया जाएगा।



आज निकली सावन की अंतिम सवारी (Mahakal Sawari sawan 2022) 
- 8 अगस्त को श्रावण मास के अंतिम सोमवार को भगवान महाकाल की चौथी सवारी बड़ी धूम-धाम से निकली। इस दौरान भगवान महाकाल ने चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में पालकी में विराजित होकर भक्तों को दर्शन दिए।
- सवारी के दौरान बैलगाड़ी पर महाकाल उमा-महेश स्वरूप में, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव रूप में नगर भ्रमण पर निकले। भगवान महाकाल की पालकी शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से बाहर निकली।
- सबसे पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान भगवान महाकाल को सलामी दी। इसके बाद सवारी महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, कहार वाड़ी होते हुए राम घाट पर पहुंची।
- यहां भगवान महाकाल का क्षिप्रा के जल से अभिषेक व पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी निर्धारित मार्गों से होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।

भादौ मास में निकलेगी 2 सवारी
पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को सावन मास समाप्त हो जाएगा और इसके अगले दिन यानी 12 अगस्त को भादौ मास शुरू हो जाएगा। इस महीने के शुरूआती दो सोमवार को भी बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाती है। इस बार ये सवारी 15 और 22 अगस्त को निकाली जाएगी। 22 अगस्त को निकाली जाने वाली सवारी को शाही सवारी कहते हैं। इस सवारी को देखने लाखों भक्त उज्जैन आते हैं। इसलिए इस दिन सवारी शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई निकलती है। ताकि अधिक से अधिक लोग भगवान के दर्शन कर सकें।

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