Ram Navami 2022: इस मंदिर में भगवान श्रीराम को माना जाता है राजा, पुलिस जवान देते हैं सलामी

Published : Apr 07, 2022, 06:11 PM IST
Ram Navami 2022: इस मंदिर में भगवान श्रीराम को माना जाता है राजा, पुलिस जवान देते हैं सलामी

सार

इस बार 10 अप्रैल, रविवार को श्रीराम नवमी (Ram Navami 2022) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन देश के सभी राम मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी और आयोजन भी होंगे। वैसे तो हमारे देश में भगवान राम के अनेक मंदिर हैं, लेकिन उन सभी में मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राजा राम मंदिर (Raja Ram Mandir Orchha) का विशेष स्थान है।

उज्जैन. मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित मंदिर में श्रीराम को भगवान और राजा दोनों के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर से और भी कई मान्यताएं औ परपराएं जुड़ी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। एक मान्यता ये भी है कि इस मंदिर में स्थित श्रीराम की प्रतिमा वही है, जो पुरातन समय में अयोध्या के मंदिर में स्थापित थी। इसलिए भले ही ओरछा का महत्व अयोध्या के समान तो नहीं है, लेकिन उससे कम भी नहीं है। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…

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यहां भगवान को दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर
ओरछा के राजा राम मंदिर में कोई भी वीआईपी नहीं है। अगर कोई वीआईपी है, तो वह सिर्फ भगवान श्रीरामचंद्र। इस मंदिर से जुड़ी एक परंपरा जो इसे और भी खास बनाती है वो ये हे कि इस यहां पुलिस जवानों द्वारा रोज सूर्यास्त और सूर्योदय के समय राजा रामचन्द्र को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। ओरछा में गार्ड ऑफ ऑनर सिर्फ श्रीराम को ही दिया जाता है, अन्य किसी को नहीं।
 

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ये है मंदिर से जुड़ी कथा
- मान्यताओं के अनुसार, किसी समय ओरछा पर राजा मधुकर शाह का राज्य था, वे श्रीकृष्ण के भक्त थे और उनकी पत्नी गणेशकुंवरी भगवान श्रीराम की। एक दिन रानी गणेशकुंवरी राजा को बिना बताए अयोध्या चली गईं, जाने से पहले उन्होंने अपने नौकरों को ये आदेश दिया कि ओरछा में शीघ्र ही एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जाए, जिसमें रामलला की मूर्ति स्थापित हो सके। 
- अयोध्या जाकर रानी ने भगवान श्रीराम को प्रसन्न करने के कई प्रयास किए। एक दिन भगवान श्रीराम उनके सामने प्रकट हुए। रानी ने उन्हें ओरछा चलने के लिए आग्रह किया। श्रीराम तैयार हो गए, पर उन्होंने तीन शर्तें रखीं- पहली ये कि वे ओरछा बाल रूप में जाएंगे, दूसरी ये कि ओरछा पहुंचने के बाद वहां कोई राजा होगा, न रानी और तीसरी ये कि उनकी प्रतिमा की स्थापना पुष्य नक्षत्र में की जाए। 
- रानी ने सभी शर्ते मान लीं। रानी श्रीराम के बालरूप के साथ ओरछा महल पहुंचीं। इसके बाद श्रीराम महल से बाहर नहीं गए और उनकी स्थापना वहीं हो गई। इसके बाद से रानी का वही महल मंदिर के रूप में विख्यात हो गया, जो आज राम राजा मंदिर के नाम से जाना जाता है।

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कैसे पहुँचें?
-ओरछा का सबसे नजदीकी हवाईअड्डा खजुराहो में है, जो यहाँ से लगभग 163 किमी दूर है। 
- अगर आप रेलमार्ग से ओरछा पहुँचना चाहते हैं तो नजदीकी रेलवे स्टेशन झाँसी है। यहां से ओरछा जाने के कई साधन उपलब्ध हैं। 
- ओरछा, झाँसी-खजुराहो सड़क मार्ग पर स्थित है। मध्य प्रदेश के शहरों से भी परिवहन के अन्य साधन ओरछा के लिए उपलब्ध हैं।

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