महाभारत के अनुसार, सत्यवती राजा शांतनु की पत्नी थी। सत्यवती के दो पुत्र थे चित्रांगद और विचित्रवीर्य। विचित्रवीर्य का विवाह काशी की राजकुमारी अंबिका और अंबालिका से हुआ था। धृतराष्ट्र और पांडु विचित्रवीर्य की ही संतान थे।
उज्जैन. सत्यवती का एक नाम मत्स्यगंधा भी था। सत्यवती का पालन-पोषण एक केवट (नाव चलाने वाला) ने किया था। इसलिए सभी यही मानते हैं कि सत्यवती केवट की पुत्री थी, लेकिन ये सच नहीं है। ये है सत्यवती के जन्म की पूरी कथा-
केवट नहीं राजा की पुत्री थी सत्यवती
प्राचीन काल में उपरिचर नाम के एक प्रसिद्ध राजा थे। उनकी पत्नी का नाम गिरिका था। एक दिन ऋतुकाल के बाद शुद्ध हुई राजा उपरिचर का पत्नी गिरिका ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से समागम की इच्छा की।
उसी दिन पितरों ने राजा को हिंसक पशुओं का वध करने की आज्ञा दी। पितरों की आज्ञा मानकर राजा उपरिचर वन में गए। वन की सुंदरता देखकर राजा के मन में काम का संचार हुआ और उनका वीर्य स्खलित हो गया।
राजा ने ये सोचकर कि मेरा ये वीर्य और गिरिका का ऋतुकाल व्यर्थ न हो, उसे एक पत्ते पर एकत्रित कर लिया। इसके बाद राजा उपरिचर ने अपने वीर्य को पुत्रोत्पत्तिकारक मंत्रों से अभिमंत्रित कर दिया।
राजा ने उस वीर्य को एक पक्षी (बाज) से अपनी पत्नी गिरिका तक पहुंचाने के लिए कहा। जब वह पक्षी रानी गिरिका के पास जा रहा था, तभी रास्ते में एक दूसरे पक्षी ने उस पर हमला कर दिया।
जिससे राजा उपरिचर का वीर्य यमुना नदी में गिर गया। उस नदी में अद्रि नाम की एक अप्सरा शाप के कारण मछली रूप में रहती थी। उसने वह वीर्य निगल लिया।
कुछ समय बाद वह मछली मछुवारों के जाल में फंस गई। मछुवारों ने जब उस मछली का पेट चीरा तो उसमें से एक नवजात लड़की व एक लड़का निकला। मछुवारों ने ये बात जाकर राज उपरिचर को बताई।
राजा ने उनमें से लड़के को अपना लिया। उस नवजात लड़की के शरीर के मछली की गंध आती थी, इसलिए राजा ने उसे केवट को सौंप दिया औ कहा कि- ये तेरी पुत्री होकर रहे। यह कन्या आगे जाकर सत्यवती के रूप में प्रसिद्ध हुई।
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