मुंबई में है देवी महालक्ष्मी का प्रसिद्ध मंदिर, समुद्र से निकली है यहां स्थापित प्रतिमा

Published : Oct 25, 2021, 12:45 PM IST
मुंबई में है देवी महालक्ष्मी का प्रसिद्ध मंदिर, समुद्र से निकली है यहां स्थापित प्रतिमा

सार

कार्तिक मास की अमावस्या पर दीपावली (Diwali 2021) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव 4 नवंबर, गुरुवार को है। इस दिन मुख्य रूप से धन की देवी महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। हमारे देश में देवी लक्ष्मी के अनेक मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ बहुत ही प्राचीन और धार्मिक महत्व रखते हैं।

उज्जैन. देश के प्रमुख लक्ष्मी मंदिरों में से एक है मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर (Mahalaxmi Temple, Mumbai)। ये मंदिर मुंबई में समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित है। यह मंदिर अत्यंत सुंदर, आकर्षक होने के साथ लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। इस मंदिर से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं भी हैं, जो इसे और भी विशिष्ट बनाती हैं। इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा की कहानी बहुत ही रोचक और चमत्कारी है। 

गर्भगृह में है 3 प्रतिमाएं
महालक्ष्मी मंदिर के मुख्य द्वार पर सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएँ स्थापित हैं। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती तीनों देवियों की प्रतिमाएँ एक साथ विद्यमान हैं। तीनों प्रतिमाओं को सोने एवं मोतियों के आभूषणों से सुसज्जित किया गया है। यहाँ आने वाले हर भक्त का यह दृढ़ विश्वास होता है कि माता उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करेंगी।

बहुत रोचक है मंदिर का इतिहास
जनश्रृति है कि अंग्रेज शासन काल के दौरान मुंबई में वर्ली और मालाबार हिल को जोड़ने के लिए दीवार का निर्माण कार्य चल रहा था। सैकड़ों मजदूर इस दीवार के निर्माण कार्य में लगे हुए थे, मगर हर दिन कोई न कोई बाधा आ रही थी। इसके कारण ब्रिटिश इंजीनियर काफी परेशान हो गए। इसी दौरान इस प्रोजेक्ट के मुख्य इंजीनियर रामजी शिवाजी के सपने में आकर देवी लक्ष्मी ने कहा कि- समुद्र के किनारे मेरी एक मूर्ति है। उस मूर्ति को वहां से निकालकर मेरी स्थापना करो। ऐसा करने से हर बाधा दूर हो जाएगी। जैसे देवी ने सपने में कहा था ठीक वैसा ही हुआ और माता के आदेशानुसार मूर्ति की स्थापना कर छोटा-सा मंदिर बनवाया गया। इसके बाद वर्ली-मालाबार हिल के बीच की दीवार बिना किसी बाधा के खड़ी हो गई। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। सन् 1831 में धाकजी दादाजी नाम के एक व्यवसायी ने छोटे से मंदिर को बड़ा स्वरूप दिया एवं जीर्णोद्धार कराया।

कैसे पहुंचें?
मुंबई भारत की व्यावसायिक राजधानी है तथा देश के प्रत्येक भाग से अच्छी तरह से रेल, रोड और वायुमार्ग से जुड़ी हुई है। किसी भी सुविधाजनक मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। मुंबई के विभिन्न स्थानों से महालक्ष्मी मंदिर के लिए साधन उपलब्ध हैं।

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