Vaishakh month: वैशाख मास में प्यासे को पानी पिलाने से हर इच्छा हो सकती है पूरी, ये हैं इस महीने से जुड़ी कथा

Published : May 05, 2022, 10:19 AM IST
Vaishakh month: वैशाख मास में प्यासे को पानी पिलाने से हर इच्छा हो सकती है पूरी, ये हैं इस महीने से जुड़ी कथा

सार

हिंदू धर्म ग्रंथों में हर महीने का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू पंचांग का दूसरा महीना वैशाख (Vaishakh month 2022) होता है। ये महीना धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही खास होता है क्योंक इस महीने में कई प्रमुख त्योहार जैसे अक्षय तृतीया, नृसिंह जयंती, गंगा सप्तमी आदि मनाए जाते हैं। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है।  

उज्जैन. भगवान विष्णु को प्रिय होने के कारण वैशाख को माधव मास भी कहते हैं। पद्म और विष्णु धर्मोत्तर पुराण के अनुसार में वैशाख महीने में की गई भगवान विष्णु की पूजा से कई गुना पुण्य फल मिलता है। वैशाख मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने और जलदान करने का भी विशेष महत्व है। यही कारण है इस महीने में लोग लोगों को पानी पिलाने के लिए प्याऊ लगवाते हैं। मान्यता है कि इस महीने में प्यासे लोगों को पानी पिलाने से त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की ही कृपा प्राप्त होती है। इस मास से जुड़ी कथा भी काफी प्रचलित है। 

ये है वैशाख मास की कथा (Vaishakh month Katha)
किसी समय वंग देश में हेमकान्त नाम से एक राजा थे। एक दिन वे शिकार खेलने वन में गए। शिकार करते-करते वे अपने सैनिकों से बिछड़ गए और थक गए। वन में उन्हें एक ऋषि दिखाई दिए, उनका नाम शतर्चि था। ऋषि उस समय समाधि थे, इसलिए उन्होंने राजा के प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया। क्रोधित होकर राजा ने उन पर जैसे ही वार करना चाहा ऋषि के अनेक शिष्य वहां आ गए और उन्होंने राजा को रोक दिया। 
राजा ने उनकी बात मान ली और शिष्यों से कहा कि “मैं बहुत थक गया हूं, तुम मेरे लिए भोजन आदि की व्यवस्था करो।”
शिष्यों ने कहा कि “ हे राजा, हम गुरु की आज्ञा के बिना कुछ नहीं करते। इसलिए हम आपका आतिथ्य नहीं कर सकते।”
शिष्यों के ऐसा करने पर राजा को क्रोध आ गया और वे बाण चलाने लगे। राजा के बाणों से कई शिष्य मारे गए। जैसे-तैसे राजा भी अपने नगर आ गए। जब उन्होंने ये बात अपने पिता को बताई तो उन्होंने राजा को ही देश निकाला दे दिया। राजा साधारण रूप में वन-वन भटकते रहे। इस तरह 28 साल बीत गए। एक दिन वैशाख मास में महामुनि त्रित जंगल से गुजर रहे थे, तभी भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह बेहोश होकर गिर पड़े। हेमकांत ने उन्हें देख लिया और पानी आदि की व्यवस्था की। 
हेमकांत ने ऐसा करने से उनके पापकर्म नष्ट हो गए। अंत समय में यमदूत जब हेमकांत के प्राण लेने आए तो वह भगवान विष्णु का ध्यान करने लगा। तभी भगवान विष्णु के दूत वहां प्रकट हुए और उन्होंने यमदूतों से कहा कि “वैशाख मास में एक मुनि को जल पिलाने और उनके प्राण बचाने से अब हेमकांत निष्पाप हो गया है, इसलिए तुम यहां से जाओ, यही भगवान विष्णु के आदेश है।”
इसके बाद जैसे ही भगवान विष्णु के दूत ने हेमकांत को स्पर्श किया तो पहले की तरह स्वस्थ और युवा हो गया। भगवान विष्णु के दूत ही हेमकांत को उनके महल लेकर गए और उनके पिता को पूरी बात बताई। भगवान विष्णु का प्रिय होने के चलते हेमकांत फिर से राजा बन गए और न्यायपूर्वक शासन करने लगे। 

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