Raksha Bandhan Chandra Grahan 2026: इस बार रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है, जिसके चलते लोगों के मन में ये संशय है कि क्या इस बार बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी या नहीं?
Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat: हर साल सावन मास के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा तिथि पर रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राधी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और भाई अपनी बहनों को उम्र भर सुरक्षा का वचन देते हैं। पंचांग के अनुसार इस बार रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। ऐसे में लोगों के मन में ये संशय है कि क्या चंद्र ग्रहण के कारण बहनें अपने भाइयों को राखी नहीं बांध पाएंगी? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा से जानें ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब…
धर्म ग्रंथों के अनुसार सावन की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार की सुबह 09 बजकर 09 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 28 अगस्त, शुक्रवार की सुबह 09 बजकर 48 मिनिट तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय 28 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
पं. शर्मा के अनुसार इस बार सावन पूर्णिमा पर यानी 28 अगस्त, शुक्रवार को चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। जिसके चलते लोगों के मन में रक्षा बंधन पर्व को लेकर कईं सवाल उठ रहे हैं। सभी लोग रक्षा बंधन पर होने वाले चंद्र ग्रहण के बारे में जानना चाहते हैं। खास बात ये है कि ये ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका कोई भी प्रभाव नहीं माना जाएगा।
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क्या बहनें बांध सकेंगी भाइयों को राखी?
विद्वानों की मानें तो चूंकि रक्षाबंधन पर होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां इसका कोई प्रभाव जैसे सूतक आदि मान्य नहीं होगा। बहनें निश्चिंत होकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। रक्षाबंधन का पर्व इस चंद्र ग्रहण से पूरी तरह से मुक्त रहेगा।
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रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
सुबह 05:57 से 09:48 तक (श्रेष्ठ मुहूर्त) दोपहर 12:03 से 12:53 तक (अभिजीत मुहूर्त) दोपहर 12:28 से 02:02 तक शाम 05:10 से 06:44 तक
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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