
Sheetala Puja 2026: देवी शीतला माता पार्वती का ही एक रूप है। हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि पर इनकी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि देवी शीतला की पूजा से शीतजन्य रोग जैसे स्मॉल पॉक्स आदि नहीं होते। देवी शीतला को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र बनाए गए हैं। इन मंत्रों का जाप करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए देवी शीतला के प्रमुख मंत्र और उनके जाप की विधि…
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मंत्र-1
ऊं ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः
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मंत्र-2
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः
मंत्र-3
वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।:
- शीतला सप्तमी या अष्टमी तिथि जब भी आप पूजा करें उस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद मंत्र जाप का संकल्प लें।
- साफ कपड़े पहनकर पहले देवी शीतला की पूजा करें और घर आकर आसन पर बैठकर मंत्र जाप शुरू करें।
- देवी शीतला के मंत्रों का जाप तुलसी का माला से करना चाहिए। ऊपर बताए गए किसी भी 1 मंत्र का जाप कर सकते हैं।
- जितना मंत्रों का संकल्प लिया है, उतने ही मंत्रों का जाप करें। मंत्र जाप के बाद अपनी मनोकामना देवी शीतला के सामने कहें।
- देवी शीतला के मंत्रों का जाप करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है और घर के सभी सदस्यों की सेहत भी ठीक रहती है।
- देवी शीतला की पूजा में दीपक और अगरबत्ती का प्रयोग न करें क्योंकि ये शीतलता की देवी मानी जाती है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।