
ऑटो डेस्क. अक्सर बजट की कमी के कारण ज्यादातर लोग सेकेंड हैंड कार खरीदने का फैसला करते है। देशभर में यूज्ड यानी प्री-ओन्ड कारों का बाजार बीते कुछ सालों से तेजी से बढ़ा हैं। ऐसे में लोग बिना जांच-परख के ही सेकेंड हैंड कार खरीद लेते हैं। कुछ ही दिनों में गाड़ी से खराबियां सामने आने लगती हैं। अगर आप भी अनअथॉराइज्ड जगह से कार खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। ऐसे में आपको काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सेकंड हैंड गाड़ी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान...
अननोन हिस्ट्री वाली गाड़ी बिल्कुल न खरीदें
सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने की तैयारी कर रहे है, तो उस गाड़ी की हिस्ट्री पता करना बेहद जरूरी है। यानी की गाड़ी खरीदने से पहले ये पता करें कि वह दुर्घटनाग्रस्त हुई है, कितनी बार सर्विसिंग की गई है। या इंजन का काम कितने बार हुआ है। अगर बिना जाने गाड़ी खरीदते है, तो आपको बार-बार मरम्मत करवाना पड़ सकता है।
कम सेफ्टी फीचर्स
अक्सर पुरानी गाड़ियों में नए मॉडल की तुलना में कम सेफ्टी फीचर्स होते है। इनमें एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल फीचर की कमी हो सकती है। ऐसे में सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदते वक्त इन बातों का ध्यान रखें।
माइलेज में कमी
जैसे-जैसे गाड़ियां पुरानी होती जाती है, वैसे-वैसे इसका माइलेज भी कम होते जाता है। इसका कारण गाड़ी की सही समय पर सर्विसिंग न करना हो सकता है। ऐसे में आप सेकेंड गाड़ी खरीदते है, आपका ईंधन का खर्चा बढ़ सकता है। ये गाड़ियां पर्यावरण प्रदूषण का कारण बन जाती है।
वारंटी पर रखें नजर
सेकेंड हैंड कारों में अक्सर कम या कोई वारंटी नहीं होती है। इसका मतलब है कि अगर कार में कोई खराबी आती है, तो इसकी सर्विसिंग या रिपेयरिंग के लिए आपको अपनी जेब से खर्च करना पड़ सकता है।
मेंटेनेंस में ढीली होगी जेब
अगर आप ज्यादा पुरानी गाड़ी खरीदते है, तो आपको उसकी समय-समय पर सर्विसिंग करवानी पड़ेगी। ऐसे में उसका मेंटेनेंस कॉस्ट उम्मीद से ज्यादा हो सकता है। ऐसे में आपकी जेब पर और असर पड़ेगा।
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