
ऑटोमोबाइल डेस्क: फेडरेशन ऑफ ऑटो डीलर्स एसोसिएशन (FADA) द्वारा गुरुवार को भारत के ऑटो रिटेल सेक्टर जुलाई 2025 के आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें भारी गिरावट देखने को मिली है। वाहन पंजीकरण में साल-दर-साल (YOY) 4.31% की गिरावट आई है। FADA ने इस गिरावट के लिए मुख्य रूप से जुलाई 2024 से उच्च आधार प्रभाव के साथ-साथ मौसम से संबंधित चुनौतियों को जिम्मेदार ठहराया है। मौसम ने उपभोक्ता और ग्रामीण गतिशीलता को प्रभावित किया है।
FADA के अध्यक्ष सी एस विग्नेश्वर मंथली वाहन खुदरा डाटा जारी करते हुए कहा कि "जुलाई की गिरावट काफी हद तक पिछले साल के असामान्य आधार के कारण है, जहां अत्यधिक उसके बाद भीषण गर्मी के बाद महीने के अंत में बिक्री में काफी सुधार देखने को मिला था।"
टू व्हीलर्स पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिला है, जिसमें साल दर साल 6.48% और महीने दर महीने 6.28% की गिरावट दर्ज की गई है। एसोसिएशन ने बताया कि लगातार भारी बारिश और फसल बुवाई की गतिविधियों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में कस्टमर्स की संख्या में कमी आई है, जिससे खरीदारी टाल दी गई।
यात्री वाहनों में भी साल दर साल 0.81% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मंथली आधार पर 10.3% की वृद्धि देखने को मिली है। पीवी खंड में इन्वेंट्री 55 दिनों के हाई स्तर पर रही है। वाणिज्यिक मोर्चे पर, वाणिज्यिक वाहन (CV) खंड में साल दर साल 0.23% की मामूली बढ़ोतरी और महीने दर महीने 4.19% की बढ़ोतरी हुई है।
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हालांकि, जुलाई 2025 में ट्रैक्टर सबसे बेहतर परफॉर्मेंस करने वाली श्रेणी में आगे आया है। इसमें साल दर साल 10.96% की बढ़ोतरी और 14.9% की क्रमिक वृद्धि हुई है।
निकटतम भविष्य को देखते हुए FADA को यह उम्मीद है कि रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और स्वतंत्रता दिवस जैसे कई त्योहारों के साथ-साथ मानसून के लगातार अच्छे परिणामों के कारण अगस्त में बिक्री में सुधार होगा। एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 59% डीलरों को अगस्त में इसमें बढ़ोतरी की पूरी संभावना है। वहीं, 9% गिरावट की भी आशंका जताई है।
जुलाई महीने में भारी गिरावट के बाद भी FADA ने हाल ही में भारतीय निर्यात पर 25% अमेरिकी टैरिफ लगाने, रुपए के अवमूल्यन और इसके परिणामस्वरूप आयात-लागत दबावों से उत्पन्न जोखिमों को चिह्नित किया है। इससे उपभोक्ता के विश्वास पर असर पड़ेगा।
अगस्त महीने में उद्योग सतर्क आशावाद के साथ एंट्री कर रहा है। हालांकि, मानसून और त्योहारी सीजन के अनुकूल परिस्थितियों के कारण मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद है। लेकिन निर्यात शुल्क में उतार-चढ़ाव और छिटपुट मौसम संबंधी व्यवधानों पर सावधानीपूर्वक नजर बनाए रखने की जरूरत है। (ANI)
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