
New EV Policy India 2025 : अब भारत में इलेक्ट्रिक कारें बनाना और चलाना और भी ज्यादा आसान होगा। मोदी सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री को पूरी तरह से नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जबरदस्त नई EV पॉलिसी जारी की है। इस पॉलिसी का मकसद भारत को इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाला ग्लोबल हब बनाना है, ताकि यहां की कंपनियां दुनिया को इलेक्ट्रिक कारें एक्सपोर्ट कर सकें और देश के युवाओं को जॉब भी मिले। सरकार ने इस पॉलिसी में कई बड़े फायदे और नियम तय किए हैं, जो न सिर्फ कंपनियों के लिए अच्छे हैं बल्कि आम लोगों के लिए भी इसका बड़ा फायदा होगा। आइए जानते हैं, इस नई पॉलिसी के मुख्य पॉइंट्स और जानते हैं इसमें क्या है खास?
सरकार चाहती है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियां ज्यादा निवेश करें। इसलिए, कंपनियों को कम टैक्स के साथ यहां प्रोडक्शन करने का मौका दिया जा रहा है। इस पॉलिसी के तहत अगर कंपनियां भारत में कम से कम 486 मिलियन डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपए) का निवेश करेंगी, तो उन्हें टैक्स में छूट मिलेगी।
अगर कोई कंपनी 35,000 डॉलर या उससे ऊपर की कीमत वाली इलेक्ट्रिक कार भारत में इम्पोर्ट करती है, तो उसे अगले 5 साल तक सिर्फ 15% इम्पोर्ट ड्यूटी (टैक्स) देनी होगी। ये टैक्स बहुत कम है, जो विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
इस स्कीम के तहत कंपनियां हर साल मैक्सिमम 8,000 इलेक्ट्रिक कारें ही भारत में इम्पोर्ट कर सकेंगी। इसका मतलब यह है कि कंपनियां अब भारत में ज्यादा प्रोडक्शन पर ध्यान देंगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
पॉलिसी का एक बड़ा नियम यह है कि जिन कंपनियों को यह मौका मिलेगा, उन्हें तीन साल के अंदर भारत में प्रोडक्शन शुरू करना होगा। मतलब, कंपनियों को जल्द से जल्द अपनी फैक्ट्री लगानी होगी और कारें बनानी होंगी।
रिपोर्ट्स की मानें तो मर्सिडीज-बेंज, स्कोडा, ह्यूंडई और किआ जैसी बड़ी ऑटो कंपनियां इस प्लान में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं। इन कंपनियों का मानना है कि नई पॉलिसी से भारत में इलेक्ट्रिक वेहिकल्स इंडस्ट्री को बड़ा फायदा होगा और वे बड़ी संख्या में नौकरियां भी देंगे।
अगर कोई कंपनी इस नई पॉलिसी का फायदा लेना चाहती है तो उसे 15 मार्च 2026 तक अप्लाई करना होगा। सबसे खास बात, निवेश में जमीन का खर्च शामिल नहीं होगा, जिससे कंपनियों का बोझ कम होगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बनेंगे और उनकी संख्या बढ़ेगी, तो कारों की कीमतें भी कंट्रोल में रहेंगी। इसके साथ ही, बेहतर चार्जिंग स्टेशन भी बनने लगेंगे, जिससे इलेक्ट्रिक कार चलाना और आसान हो जाएगा। साथ ही एनवायरमेंट भी साफ रहेगा क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियां पॉल्यूशन कम फैलाती हैं।
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