एक ऐसा शहर जहां VOTE देकर जनता ने बंद करवा दिया E-Scooter, कहा- नहीं चाहिए ऐसा सिरदर्द

Published : Apr 04, 2023, 05:25 PM IST
shared e scooters banned in paris

सार

शहर के मेयर ने इसी साल जनवरी में रेफरेंडम कराने का फैसला किया था। जिसमें पूछा गया कि ई स्कूटर्स शहर में चलने दिया जाए या बैन कर दिया जाए। 2 अप्रैल को हुए रिफरेंडम में जनता ने बैन करने को लेकर अपना वोट दिया।

ऑटो डेस्क : एक तरफ इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्हें बेहतर फ्यूचर बताया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ एक शहर में वोटिंग के जरिए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर को बैन कर दिया गया है। पब्लिक ने इस ई-स्कूटर को सिरदर्द बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा कोई भी स्कूटर नहीं चाहिए। ऐसा करने वाला शहर है फ्रांस (France) की राजधानी पेरिस (Paris)...यहां एक रेफरेंडम की हेल्प से Shared electric scooters पर बैन लगवा दिया गया है। हालांकि, जिस ई स्कूटर के रिफरेंस में इसकी बात हो रही है, बैन होने वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर वो नहीं है। यह स्कूटर है तीन पहियों वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर्...आइए जानते हैं पूरा मामला

89 प्रतिशत ने कहा- नहीं चाहिए सिरदर्द

2 अप्रैल, 2023 को शहर में एक रेफरेंडम किया गया। जिसमें पेरिस के 7 प्रतिशत लोगों ने पार्टिसिपेट किया। इनमें 89 प्रतिशत ने इलेक्ट्रिक स्कूटर्स पर बैन लगाने के पक्ष में समर्थन किया। वहीं, 11 प्रतिशत ने माना की इलेक्ट्रिक स्कूटर्स चलने चाहिए। बता दें कि पेरिस में तीन कंपनियों के करीब 15,000 शेयर्ड ई-स्कूटर दौड़ते हैं। इनके कॉन्ट्रैक्ट 1 सितंबर, 2023 तक हैं। इसके बाद शहर में ये गाड़ियां बंद हो जाएंगी। वोटिंग के बाद पेरिस के मेयर ऐन हिडाल्गो ने कहा कि ‘लोगों ने शेयर्ड ई-स्कूटर के खिलाफ अपना वोट दिया है। बैन प्राइवेट ई-स्कूटर्स पर नहीं लगाया गया है।'

क्यों बंद किए गए ई-स्कूटर्स

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेरिस यूरोप का उन शहरों में है, जहां सबसे पहले ई-स्कूटर्स चलने शुरू हुए थे। शहर में साइकिल ट्रैक पर ये ई-स्कूटर चलाए जा सकते हैं। शेयर्ड ई-स्कूटर्स को पर्यावरण के लिए बेहतर बताते हुए प्रशासन की तरफ से इसका जबरदस्त तरीके से सपोर्ट किया गया था। ये ई स्कूटर्स ईको-फ्रेंडली और सुविधाजनक तो थे लेकिन इनसे समस्याएं भी खूब हुईं। सख्त नियमों और बड़े अमाउंट के फाइन के बावजूद इसे चलाने वाले नियमों का पालन नहीं करते थे। इनमें जो सबसे बड़ी समस्याएं थी, वो

  • राइडर्स 27 किलोमीटर तक की स्पीड से इन स्कूटर्स को चलाते थे।
  • कई राइडर्स तो बिना हेलमेट के ही ई-स्कूटर्स को दौड़ाते थे।
  • 12 साल तक के बच्चे भी इसे कानूनी तौर पर बुक कर सकते थे।
  • नियम यह भी था कि इन स्कूटर्स को चलाने के लिए अच्छी विजिबिलिटी वाले कपड़े पहनने थे लेकिन कम ही लोग इसका पालन करते थे।
  • ट्रैफिक से उल्टी डायरेक्शन में राइड करने पर 135 यूरो यानी करीब 12,000 रुपए का फाइन था। स्पीड ज्यादा होने पर 1,500 यूरो यानी करीब 1.3 लाख रुपए का फाइन था।
  • 2021 में तेज रफ्तार ई-स्कूटर से टकराने की वजह से एक महिला के सिर में चोट आई थी और फिर कार्डिएक अरेस्ट से उसकी जान चली गई थी। जिसके बाद बैन की मांग उठी।
  • ई-स्कूटर की सुविधा देने वाली कंपनियां यह भी सुविधा देती थीं कि राइडर्स राइड बुक करने के बाद कहीं पर भी स्कूटर को छोड़ सकते थे।
  • ई-स्कूटर्स कहीं भी छोड़ने की वजह से सड़कों के किनारे, शहर के पार्क और चौक-चौराहों पर बड़ी संख्या में ई-स्कूटर्स मिलते थे।
  • 35 यूरो मतलब करीब 3,000 रुपए के फाइन के बावजूद लोग सही तरीके से स्कूटर्स को सही जगह पार्क नहीं करते थे।

रेपरेंडम करने का फैसला कब हुआ

इन सब समस्याओं को देखने के बाद मेयर हिडाल्गो ने इसी साल जनवरी में रेफरेंडम करने का फैसला किया। जिसमें पूछा गया कि ई स्कूटर्स शहर में चलने दिया जाए या बैन कर दिया जाए। 2 अप्रैल को हुए रिफरेंडम में जनता ने बैन करने को लेकर अपना वोट दिया।

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