'पाथेर पांचाली' से 'बाहुबली' तक, 7 फिल्में जिन्होंने देश ही नहीं दुनिया में फहराया भारत का परचम

Published : Aug 14, 2019, 07:48 PM ISTUpdated : Aug 14, 2019, 07:51 PM IST
'पाथेर पांचाली' से 'बाहुबली' तक, 7 फिल्में जिन्होंने देश ही नहीं दुनिया में फहराया भारत का परचम

सार

21 अप्रैल, 1913 को देश की पहली फिल्म 'हरिश्चन्द्र' मुंबई के ओलिंपिया सिनेमा में रिलीज हुई। हालांकि इस फिल्म में महज चित्र ही थे। आजादी के बाद 1955 में आई सत्यजीत रे की फिल्म 'पाथेर पांचाली' ने दुनिया में भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दिलाई।

एंटरटेनमेंट डेस्क। अंग्रेजों की 200 साल की दास्तां के बाद 15 अगस्त 1947 को हिंदुस्तान आजाद हुआ। इसके बाद भारत के हर क्षेत्र में विकास की गंगा बहनी शुरू हुई। जहां तक सिनेमा की बात है तो हमारे यहां अंग्रेजों के जमाने में भी फिल्में बनती थीं, लेकिन तब तकनीक उतनी विकसित नहीं थी। 21 अप्रैल, 1913 को देश की पहली फिल्म 'हरिश्चन्द्र' मुंबई के ओलिंपिया सिनेमा में रिलीज हुई। हालांकि इस फिल्म में महज चित्र ही थे। 1930 के आसपास फिल्मों के साथ आवाज को जोड़ने की तकनीक विकसित हुई और इसके साथ ही 1931 में हमारी पहली बोलती फिल्म 'आलमआरा' रिलीज हुई। 1947 तक आते-आते भारतीय सिनेमा में रफ्तार आने लगी थी और मुंबई में हमारी फिल्म इंडस्ट्री फलने-फूलने लगी। आजादी के बाद भारत में एक से बढ़कर एक फिल्में बनीं, जिन्होंने न सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख दिया। हम बता रहे हैं आजादी के बाद बनी ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में...

1- पाथेर पांचाली
1955 में आई सत्यजीत रे की फिल्म 'पाथेर पांचाली' ने दुनिया में भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दिलाई। पाथेर पांचाली को दुनियाभर में कई प्रतिष्ठित अवॉर्डों से नवाजा गया। कान्स फिल्म फेस्टिवल में इसे बेस्ट ह्यूमन डाक्यूमेंट का अवॉर्ड मिला, तो वहीं बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म कैटेगरी का सेल्जनिक गोल्डन लॉरेल अवॉर्ड मिला। इतना ही नहीं, 1957 में सैन फ्रैंसिस्को में फिल्म को बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर कैटेगरी में गोल्डन गेट अवॉर्ड से भी नवाजा गया। 

2- मदर इंडिया
भारत की महानतम फिल्मों में शुमार थी 'मदर इंडिया'। 1957 में रिलीज हुई 'मदर इंडिया' फिल्म इतनी पॉपुलर हुई कि इसे ऑस्कर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म के लिए नॉमिनेट किया गया। 'मदर इंडिया' महज एक वोट से भले ही ऑस्कर जीतने से चूक गई लेकिन दुनियाभर में इस फिल्म को जबर्दस्त तारीफ मिली। 1958 में फिल्म को नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। मदर इंडिया को बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर (महबूब खान) कैटेगरी में फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। 

3- शोले 
आजादी के बाद बॉलीवुड इतिहास की सबसे पॉपुलर फिल्मों की बात करें तो इनमें 'शोले' (1975) का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। रमेश सिप्पी की इस फिल्म ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया और इसे कई इंटरनेशनल अवॉर्ड्स से नवाजा गया। 1999 में बीबीसी इंडिया ने शोले को 'फिल्म ऑफ द मिलेनियम' घोषित किया।  2002 में  ब्रिटिश फिल्म इंस्टिट्यूट के एक सर्वे में इसे 'सर्वश्रेष्ठ 10 भारतीय फिल्मों' में शामिल किया गया। इतना ही नहीं, टाइम मैगजीन ने 2010 में इसे 'बेस्ट ऑफ बॉलीवुड' में शामिल किया।

4- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
रोमांस के बादशाह यश चोपड़ा और शाहरुख खान की जोड़ी ने 1995 में बॉलीवुड को एक ऐसी माइलस्टोन फिल्म दी, जो सदियों तक याद रखी जाएगी। फिल्म की पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज के बाद यह फिल्म 23 साल तक मुंबई के मराठा मंदिर थिएटर में चलती रही। इसने शोले के लगातार 5 साल तक चलने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' को ब्रिटिश फिल्म रिफरेंस बुक '1001 Movies You Must See Before You Die'में शामिल किया गया है।

5- लगान 
बॉलीवुड में मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से मशहूर आमिर खान स्टारर मूवी 'लगान' 2001 में रिलीज हुई। आशुतोष गोवारिकर के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म अंग्रेजों द्वारा भारतीय किसानों से वसूले जाने वाले लगान पर बेस्ड है। फिल्म को कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सराहा गया। 'मदर इंडिया' और 'सलाम बॉम्बे' के बाद यह भारत की तीसरी फिल्म थी, जिसे ऑस्कर में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया। इसके साथ ही फिल्म को 8 नेशनल अवॉर्ड, 9 फिल्मफेयर और 10 कैटेगरी में आइफा अवॉर्ड भी मिला।

 

6- ब्लैक फ्राइडे 
1993 में हुए मुंबई बम ब्लास्ट की साजिश पर बेस्ड यह फिल्म 2007 में रिलीज हुई। फिल्म के डायरेक्टर अनुराग कश्यप इसे 2004 में ही रिलीज करना चाहते थे, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसके कंटेंट पर आपत्ति जताते हुए बैन लगा दिया था। फिल्म को लॉस एंजिलस के इंडियन फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड जूरी प्राइज मिला था। इसके अलावा 57वें लोकार्नो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी यह फेस्ट फिल्भ कैटेगरी के गोल्डन लिओपोर्ड अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुई थी। 

7- बाहुबली (I-II) 

भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य फिल्मों की बात करें तो एसएस राजामौली की 'बाहुबली' का नाम सबसे आगे होगा। दो पार्ट में 2015 और 2017 में रिलीज हुई इस फिल्म सीरिज ने न सिर्फ कमाई के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड़े बल्कि भारत के अलावा विदेशों में भी काफी पॉपुलर हुई। फिल्म के फर्स्ट पार्ट को जहां बेस्ट स्पेशल इफेक्ट्स के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला, वहीं सेकंड पार्ट को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में टेल्स्ट्रा पीपुल्स च्वाइस अवॉर्ड से नवाजा गया। बाहुबली 2 को तीन कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड भी मिला। फिल्म का प्रीमियर ब्रिटिश फिल्म इंस्टिट्यूट में हुआ और इसे 39वें मास्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया। 
 

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