
एंटरटेनमेंट डेस्क. डायरेक्टर अयान मुखर्जी की 5 सालों की मेहनत ब्रह्मास्त्र को आज देशभर के दर्शक अपना रिपोर्ट कार्ड देंगे। फिल्म देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अगर आपने अभी तक है फिल्म नहीं देखी तो यहां जानिए की यह फिल्म देखने जाना चाहिए या नहीं?
| रेटिंग | 3/5 |
| डायरेक्टर | अयान मुखर्जी |
| स्टार कास्ट | रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, अमिताभ बच्चन, मौनी रॉय, नागार्जुन आदि |
| प्रोड्यूसर | करन जौहर |
| म्यूजिक डायरेक्टर | प्रीतम चक्रवर्ती |
| जोनर | फैंटसी-एडवेंचर |
फिल्म की शुरुआत अमिताभ बच्चन के वॉइस ओवर से होती है जहां वो ब्रह्मास्त्र समेत बाकी अस्त्रों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसके बाद कैमियों रोल में एंट्री होती है शाहरुख खान की। इस सीन के वीएफएक्स और एक्शन देखकर ऐसा लगता है मानो इस फिल्म को हिट होने से कोई नहीं रोक सकता पर जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है इसकी स्पीड स्लो हो जाती है। और फिर होती है आलिया भट्ट की एंट्री और इसके बाद आते हैं कुछ कमजोर सीन्स और फिर जबरन ढूंसे गए गाने जो इस फिल्म को सब्जेक्ट से कोसों दूर लेकर चले जाते हैं। सेकंड हाफ में अयान फिल्म को समेटने की कोशिश करते रहे पर पूरी तरह से दर्शकों को फिल्म में वापस नहीं ले जा सके। फिल्म का कॉन्सेप्ट तो बहुत बेहतर है पर अयान इसकी कहानी में भटक गए। वे इसे और बेहतर बना सकते थे। खासतौर से फिल्म का क्लाइमैक्स सीन और भी ज्यादा बेहतर हो सकता था।
कहानी
कहानी की शुरुआत होती है शिवा (रणबीर कपूर) नाम के आज के युवा से जो डीजे है और एक अनोखी लाइफ जीता है। शिवा की मुलाकात एक पार्टी में ईशा (आलिया भट्ट) से होती है जो पहली मुलाकात में उसकी दीवानी हो जाती है। इसी बीच शिवा को कई ऐसी चीजें दिखती और सुनाई देती हैं जो आम लोगों को नजर नहीं आती। शिवा को लगता है कि उसके साथ कुछ लोचा है पर वक्त के साथ वह समझ जाता है कि इन घटनाओं का कुछ अलग ही मकसद है। शिवा और ईशा इस मिलकर इस गुत्थी को सुलझाने में जुट जाते हैं। इस बीच वे आर्टिस्ट मोहन (नागार्जुन) की मदद करते हैं जो उन्होंने गुरुजी (अमिताभ बच्चन) तक पहुंचने का रास्ता बताता है। फिल्म में आगे क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
एक्टिंग
रणबीर कपूर यहां एक सुपरहीरो के रोल में हैं पर कई सीन में वे थके हुए नजर आते हैं। आलिया भट्ट फिल्म में क्यूटनेस लेकर आती हैं। अमिताभ बच्चन फिल्म में सीरियसनेस लेकर आते हैं। शाहरुख खान अपने कैमियो में बाजी मार जाते हैं। नागार्जुन को स्पेस कम मिला पर वे अहम रोल निभाते दिखते हैं। डिम्पल कपाड़िया का रोल फिल्म में ना के बराबर है। फिल्म में 5 युवा डेब्यूटेंट्स भी हैं जो ब्रह्मांश के रोल में नजर आते हैं। उनका काम भी बेहतर है। विलन के रोल में मौनी रॉय का काम अच्छा है पर उनका रोल कमजोर है। कुल मिलाकर सभी की एक्टिंग नॉर्मल है। किसी का भी परफॉर्मेंस ओवर द टॉप नहीं है।
डायरेक्शन
फिल्म के फर्स्ट हाफ की शुरुआत अच्छी है। कुछ सीन में वीएफएक्स और एक्शन दोनों बहुत ही जबरदस्त हैं। आप अस्त्रवर्स के बारे में समझने की कोशिश कर ही रहे होते हैं कि अचानक बीच में रणबीर-आलिया की लव स्टोरी आ जाती है। पहली नजर में प्यार वाला कॉन्सेप्ट यहां आपको बोर भी करता है और थोड़ा सा अनरियल भी लगता है। खैर, आप उम्मीद करते हैं कि सेकंड हाफ में स्पीड को बेहतर किया जाएगा पर ऐसा नहीं होता। फिल्म के गाने और रणबीर का अपनी ताकत समझने वाला सीक्वेंस स्लो भी हैं और फिल्म को बेवजह खींचते भी हैं। फिल्म से एक बेहतर क्लामैक्स की उम्मीद की जाती है पर वहां भी दर्शक निराश ही होते हैं। अफसोस कि करीबन 20 मिनट के एक्शन सीक्वेंस में कोई भी ऐसा सीन नहीं है जहां व्यूअर्स को गूजबंप्स फील हो सकें। कुल मिलाकर अयान ने सिर्फ दो ही अच्छे काम किए हैं। एक तो उनकी फिल्म का कॉन्सेप्ट फ्रेश और इंट्रेस्टिंग है और दूसरा फिल्म के वीएफएक्स एक दम हॉलीवुड लेवल के हैं।
म्यूजिक
फिल्म के गाने यूं ही सुनने में तो बेहतर लगते हैं पर फिल्म में इन्हें जिन सिचुएशंस में रखा गया है वो ठीक नहीं हैं। 'केसरिया' गाने का छोड़कर बाकी सभी गाने जबरदस्ती ठूंसे और खींचे हुए लगते हैं।
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