
8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग का गठन हुए अब करीब 11 महीने हो चुके हैं। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला तीन लोगों का पैनल देशभर में बैठकें कर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगें सुन रहा है। इस दौरान कर्मचारी संगठनों के साथ कई बैठकें हुई हैं और सैलरी बढ़ाने से लेकर फिटमेंट फैक्टर और DA मर्जर तक कई मांगें सामने आई हैं। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच बड़ा सवाल है कि 8वें वेतन आयोग से सैलरी बढ़ने और महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में जोड़ने को लेकर क्या उम्मीद की जा सकती है? ऐसे में आइए जानते हैं कि अब तक क्या हुआ है, कर्मचारी संगठन क्या मांग रहे हैं और आगे किस बात पर नजर रखनी चाहिए...
3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन हुआ था और अब इस बात को पूरे 11 महीने हो चुके हैं। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला तीन लोगों का पैनल देशभर में बैठकें कर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगें सुन रहा है। दिल्ली, लद्दाख, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के बाद हाल ही में 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में एक अहम बैठक हुई है। अब सबकी नजरें 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में होने वाली अगली बड़ी चर्चा पर टिकी हैं। इन 11 महीनों की मैराथन बैठकों में कर्मचारियों की सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (DA) के मर्जर पर यूनियनों ने कई कड़े प्रस्ताव रखे हैं।
महंगाई भत्ता (DA) कर्मचारियों की सैलरी का अहम हिस्सा है। इसका मकसद महंगाई के असर को कुछ हद तक कम करना है। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, जुलाई 2023 में DA 46% था, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 60% तक पहुंच गया। लगातार बढ़ते DA के बीच कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि नई सैलरी स्ट्रक्चर में बेसिक सैलरी तय करते समय महंगाई और खर्चों में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखा जाए। इसी वजह से फिटमेंट फैक्टर की मांग भी अहम हो गई है।
फिटमेंट फैक्टर वो गुणक यानी मल्टीप्लायर है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा बेसिक सैलरी को नई सैलरी स्ट्रक्चर में बदलने के लिए किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो नए वेतन आयोग के तहत संशोधित बेसिक पे तय करने में ये अहम रोल निभाता है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की गई थी, जबकि छठे वेतन आयोग में 1.86 का फैक्टर अपनाया गया था। अब आठवें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों ने इससे ज्यादा फैक्टर की मांग रखी है। NC-JCM के कर्मचारी पक्ष ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज ने भी 3.83 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। वहीं, मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन, सर्वे ऑफ इंडिया ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।
फिटमेंट फैक्टर के अलावा DA को बेसिक सैलरी में मिलाने की मांग भी चर्चा में है। इसका मकसद कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में महंगाई के असर को शामिल करना है। लेकिन अभी DA मर्जर को मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशंस (FNPO) ने एक स्थायी वेतन समीक्षा निकाय बनाने का सुझाव दिया है। उसके प्रस्ताव के मुताबिक, जब DA या पेंशनर्स का महंगाई राहत भत्ता (DR) 50% तक पहुंचे, तो 90 दिनों के भीतर संशोधित फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की जाए। FNPO ने DA या DR के 25% से ऊपर जाने पर इसे बेसिक पे या पेंशन में मिलाने का सुझाव भी दिया है। भारत पेंशनर्स समाज ने भी DR को बेसिक पेंशन में जोड़ने की मांग उठाई है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य वेतन और पेंशन को महंगाई के असर से बेहतर तरीके से जोड़ना है। हालांकि, DA मर्जर कब होगा, किस दर पर होगा या होगा भी या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स अब आयोग की अंतिम सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, आयोग की रिपोर्ट मई-जून 2027 तक पेश किए जाने की संभावना जताई गई है। पहले आयोग अपनी सिफारिशें देगा और फिर केंद्र सरकार उन पर विचार करके फैसला करेगी। इसके बाद ही नई बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन से जुड़े बदलावों की तस्वीर साफ होगी।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी कर्मचारी यूनियनों की मांगों और प्रस्तावों पर आधारित है। सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार के अप्रूवल के बाद ही लागू होंगी।
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