
8th Pay Commission Fitment Factor: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी हलचल शुरू हो चुकी है। 8वें वेतन आयोग की बैठकों का नया दौर 7 अक्टूबर से बेंगलुरु में शुरू हो रहा है। इसके बाद टीम 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में मंथन करेगी। सबसे बड़ा सवाल कर्मचारियों के मन में एक ही है, क्या इस बार उनकी न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹72,000 तक पहुंच सकती है? आइए समझते हैं कि ये पूरा मामला क्या है और इसके पीछे का फॉर्मूला क्या कहता है...
वेतन आयोग जब भी नई सैलरी तय करता है, तो उसके लिए एक नंबर का इस्तेमाल होता है, जिसे 'फिटमेंट फैक्टर' कहते हैं। यह एक तरह का मल्टीप्लायर (गुणांक) है। आपकी मौजूदा बेसिक सैलरी को इसी नंबर से गुणा (Multiply) करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है। 6वें वेतन आयोग में ये 1.86 था। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था, जिससे कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी। अब 8वें वेतन आयोग में आयोग ने अभी कोई आधिकारिक नंबर तय नहीं किया है, लेकिन यूनियनों ने बड़ा दांव चला है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बीते सालों में महंगाई और जीवन स्तर का खर्च काफी बढ़ चुका है। इसी को आधार बनाकर अलग-अलग कर्मचारी यूनियनों ने अपनी मांगें रखी हैं। नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर इसे मान लिया जाए, तो लेवल-1 कर्मचारी की शुरुआती बेसिक पे ₹18,000 से उछलकर करीब ₹69,000 हो सकती है। वहीं, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने 4 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है। इस हिसाब से लेवल-1 की न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 पहुंच जाएगी।
| पे लेवल | 7वें वेतन आयोग में बेसिक पे | 3.833 फिटमेंट फैक्टर पर (अनुमानित) | 4.0 फिटमेंट फैक्टर पर (अनुमानित) |
|---|---|---|---|
| लेवल 1 (शुरुआती पद) | ₹18,000 | ₹69,000 | ₹72,000 |
| लेवल 6 (ग्रेड पे 4200) | ₹35,000 | ₹1,35,688 | ₹1,41,600 |
| लेवल 7 (ग्रेड पे 4600) | ₹44,900 | ₹1,72,101 | ₹1,79,600 |
| लेवल 8 (राजपत्रित/ऑफिसर) | ₹47,600 | ₹1,82,450 | ₹1,90,400 |
नोट: ये सिर्फ बेसिक सैलरी का गणित है। इसमें DA, HRA, TA जैसे भत्ते अलग से जुड़ते हैं।
कर्मचारियों के लिए ये समझना बेहद जरूरी है कि ₹69,000 या ₹72,000 का आंकड़ा सिर्फ कर्मचारी यूनियनों की मांग (Demand) है, सरकार द्वारा तय की गई रकम नहीं। आयोग सभी पक्षों और सरकारी खजाने की स्थिति का आकलन करके अपनी सिफारिशें देगा, जिसके बाद कैबिनेट अंतिम फैसला लेगी। इसलिए इसे पक्की सैलरी न मानकर सिर्फ एक संभावित ड्राफ्ट प्रस्ताव के तौर पर देखना चाहिए।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला पैनल देशभर में राज्य सरकारों, कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर्स संगठनों से मिलकर उनकी जरूरतें और शिकायतें सुन रहा है। साथ ही अलग-अलग मंत्रालयों से कर्मचारियों का पूरा डेटा भी जुटाया जा रहा है। 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु और फिर 22-23 अक्टूबर को मुंबई की बैठकों में पेंशन, पे-स्ट्रक्चर, फिटमेंट फैक्टर और कर्मचारियों के मनोबल जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू की थी। नियमों के मुताबिक, आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में वक्त लगता है। संभावना है कि आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें मई या जून 2027 तक सरकार को सौंपेगा। यानी रिपोर्ट आने में अभी लगभग 7 से 8 महीने का समय लग सकता है।
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