
Adani Group Shares Fall Reasons: अगर किसी कंपनी को अपने इतिहास की सबसे बेहतरीन क्रेडिट रेटिंग मिले, तो उम्मीद यही होती है कि अगले दिन उसके शेयरों में रॉकेट जैसी तेजी आएगी। लेकिन गुरुवार को अडानी ग्रुप के शेयरों में ठीक इसका उलटा देखने को मिला। एक दिन पहले ही क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CARE ने अडानी एंटरप्राइजेज की रेटिंग बढ़ाकर 'CARE AA' की थी। इसके बावजूद 8 अक्टूबर को शेयर बाजार खुलते ही अडानी ग्रुप की कंपनियों में भगदड़ मच गई और कई शेयर 10% तक टूट गए। आखिर इतनी बड़ी खुशखबरी के बाद भी अडानी के शेयरों को किसकी नजर लग गई? आइए जानते हैं अडानी स्टॉक्स में अचानक बिकवाली क्यों आई और कौन सा शेयर कितना गिरा...
Adani Green Energy Share: 10% की सबसे बड़ी गिरावट
ग्रुप की कंपनियों में सबसे ज्यादा मार अडानी ग्रीन एनर्जी पर पड़ी। दोपहर 3 बजे तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर यह शेयर देखते ही देखते 10% टूटकर ₹1,208 के निचले स्तर पर आ गया। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में चौतरफा सेलिंग प्रेशर के चलते दिनभर इसमें रिकवरी देखने को नहीं मिली।
Adani Enterprises Share: 7% तक लुढ़का फ्लैगशिप शेयर
समूह की मुख्य कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज में ऐतिहासिक रेटिंग अपग्रेड के बावजूद जोरदार मुनाफावसूली दिखी। कारोबार के दौरान शेयर करीब 7% टूटकर ₹2,548.50 के निचले स्तर तक फिसला और दोपहर के समय 6% से ज्यादा की गिरावट के साथ ₹2,576 के आसपास ट्रेड करता नजर आया।
Adani Power Share: 5.43% की गिरावट के साथ फिसला
बिजली उत्पादन से जुड़ी अडानी पावर में भी निवेशकों ने बिकवाली का रुख बनाए रखा। बाजार के कमजोर सेंटिमेंट के बीच यह शेयर 5.43% की कमजोरी दर्ज करते हुए दिन के निचले स्तरों के करीब बना रहा।
Adani Ports Share: 4% से ज्यादा का गोता
ग्रुप के सबसे मजबूत लार्ज-कैप स्टॉक्स में शुमार अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन भी बिकवाली से बच नहीं सका। शेयर 4.05% फिसलकर ₹1,679.30 पर आ गया, जिससे लार्ज-कैप पोर्टफोलियो पर सीधा असर पड़ा।
Adani Total Gas Share: 2.78% की नरमी
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर की कंपनी अडानी टोटल गैस में अपेक्षाकृत कम गिरावट रही, लेकिन यह भी दबाव से अछूती नहीं रही और करीब 2.78% के नुकसान के साथ लाल निशान में कारोबार करती दिखी।
जब कंपनी के फंडामेंटल्स और कर्ज चुकाने की साख को मजबूत बताया गया, तो फिर यह गिरावट क्यों आई? बाजार जानकारों के मुताबिक इसके 2 बड़े कारण हैं...
1. पूरे बाजार में मची चौतरफा भगदड़
अडानी ग्रुप में आई यह गिरावट किसी आंतरिक संकट की वजह से नहीं, बल्कि पूरे घरेलू शेयर बाजार में आए भूचाल का नतीजा है। गुरुवार को सेंसेक्स 1,200 अंकों से ज्यादा क्रैश हो गया और निफ्टी गिरकर अपने 52-हफ्तों के नए निचले स्तर (52-week low) पर पहुंच गया। जब विदेशी निवेशक (FIIs) आक्रामक बिकवाली करते हैं, तो मजबूत से मजबूत शेयर भी दबाव में आ जाते हैं।
2. 'न्यूज आते ही मुनाफावसूली' (Sell on News)
मार्केट में यह पुराना ट्रेंड है कि जब किसी बड़ी खबर या अपग्रेड का ऐलान आधिकारिक तौर पर हो जाता है, तो शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स मुनाफावसूली करने लगते हैं। गुरुवार को भी ट्रेडर्स ने रेटिंग की खबर आने के बाद सुरक्षित रुख अपनाते हुए बिकवाली शुरू कर दी, जिसने बाजार की तेज गिरावट में आग में घी का काम किया।
इतिहास की सबसे हाई रेटिंग
CARE Ratings ने अडानी एंटरप्राइजेज की लॉन्ग-टर्म रेटिंग को 'CARE AA- Stable' से बढ़ाकर 'CARE AA Stable' किया है। वहीं शॉर्ट-टर्म के लिए टॉप-टियर रेटिंग 'CARE A1+' को बरकरार रखा गया।
मजबूत कैश-फंड, एयरपोर्ट हिस्सेदारी बिक्री
जुलाई 2026 में QIP के जरिए ₹15,000 करोड़ जुटाए गए, जिसने बैलेंस शीट को काफी ताकत दी है। अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स में 5.54% हिस्सेदारी बेचे जाने से जुलाई 2027 तक कंपनी के खजाने में ₹9,825 करोड़ और आएंगे।
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह (Investment Advice) न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह के निवेश या शेयर खरीदने-बेचने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।
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