
नई दिल्ली: भारत के ई-कॉमर्स बाज़ार में अब 'स्पीड' ही सब कुछ है। वो ज़माना गया जब ऑनलाइन ऑर्डर करने के बाद सामान के लिए दो-तीन दिन इंतज़ार करना पड़ता था। देश में क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) ने ग्राहकों के शॉपिंग करने का तरीका ही बदल दिया है। अब इसी तेज़ रफ़्तार वाले मार्केट पर कब्ज़ा करने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी 'अमेज़न' ने एक ज़बरदस्त प्लान बनाया है। कंपनी ग्राहकों को ज़रूरी सामान सिर्फ कुछ ही मिनटों में उनके दरवाज़े तक पहुंचाने के लिए अपने नेटवर्क को बड़े पैमाने पर फैलाने जा रही है।
इसी बड़ी स्ट्रैटेजी के तहत, कंपनी ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि वह अपनी सबसे तेज़ डिलीवरी सर्विस 'अमेज़न नाउ' (Amazon Now) को देश के 300 से ज़्यादा शहरों में शुरू करेगी।
अमेज़न के इस बड़े ऐलान के ठीक बाद, कंपनी के ग्लोबल CEO एंडी जैसी (Andy Jassy) का भारत आना काफी सुर्खियां बटोर रहा है। उन्होंने मुंबई में 'अमेज़न नाउ' के माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर (Micro-Fulfillment Centre) का खुद दौरा किया। जैसी ने करीब से देखा कि भारत में 'मिनटों में डिलीवरी' की मॉडर्न टेक्नोलॉजी और प्रोसेस कैसे काम करता है। उनके इस दौरे से साफ़ है कि अमेज़न भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट को लेकर ग्लोबल लेवल पर कितना सीरियस है।
फिलहाल, 'अमेज़न नाउ' की सर्विस बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे और कोच्चि समेत देश के 15 से ज़्यादा बड़े शहरों में ही मिल रही है। पहले से ही करीब 5 करोड़ से ज़्यादा ग्राहक इसका फायदा उठा रहे हैं, और जल्द ही यह सुविधा कुल 300 शहरों के लोगों को भी मिलेगी।
अमेज़न नाउ पर मिलने वाले मुख्य प्रोडक्ट्स:
अमेज़न की यह फटाफट सर्विस भारतीयों के बीच इतनी पॉपुलर हो गई है कि लॉन्च के बाद से हर तिमाही (Quarter) में इसके ऑर्डर की संख्या दोगुनी (Double) हो रही है। कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक, जब से अमेज़न प्राइम मेंबर्स ने इस सर्विस का इस्तेमाल शुरू किया है, उनकी कुल शॉपिंग में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है।
ग्राहकों तक इतनी तेज़ी से और सुरक्षित तरीके से सामान पहुंचाने के असली हीरो डिलीवरी पार्टनर्स हैं, जो दिन-रात मेहनत करते हैं। ऐसे हज़ारों फ्रंटलाइन वर्कर्स की भलाई और सुरक्षा के लिए अमेज़न ने 'सम्मान' (Samman) नाम से एक बड़ा वेलफेयर प्रोग्राम शुरू किया है। अमेज़न ने हाल ही में भारत में निवेश के लिए जो 300 मिलियन डॉलर का फंड घोषित किया था, उसका एक बड़ा हिस्सा इसी योजना पर खर्च किया जाएगा।
बच्चों को मुफ्त शिक्षा: डिलीवरी पार्टनर्स के बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए कंपनी की तरफ से स्पेशल स्कॉलरशिप (Scholarship) दी जाएगी।
हेल्थ इंश्योरेंस और सुरक्षा: हर पार्टनर को मुफ्त हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, रोड सेफ्टी की ट्रेनिंग और सरकारी वेलफेयर स्कीम का फायदा उठाने में भी मदद की जाएगी।
'आश्रय' रेस्ट सेंटर्स: खराब मौसम में भी काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स को काम के बीच थोड़ा आराम करने और फ्रेश होने के लिए अमेज़न इस साल देशभर में 250 'आश्रय' (Aashray) सेंटर बना रहा है। इन सेंटर्स की सबसे खास बात यह है कि यहां सिर्फ अमेज़न ही नहीं, बल्कि स्विगी, ज़ोमैटो, ब्लिंकिट जैसी किसी भी कंपनी का डिलीवरी पार्टनर आकर आराम कर सकता है!
"अमेज़न नाउ हमारे इतिहास में सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाला सेगमेंट है। भारतीय ग्राहकों से मिल रहे शानदार रिस्पॉन्स को देखते हुए हमने इसे 300 शहरों तक ले जाने का फैसला किया है। यह हमारे डिलीवरी पार्टनर्स की लगातार मेहनत के बिना बिल्कुल संभव नहीं था, जो हमारे ई-कॉमर्स बिजनेस की असली रीढ़ हैं। इसलिए, 'सम्मान' योजना के पीछे हमारा मकसद यह है कि जैसे-जैसे हमारा बिजनेस बढ़े, हमें आगे बढ़ाने वाले हमारे पार्टनर्स का जीवन स्तर भी बेहतर हो।"
— समीर कुमार, कंट्री मैनेजर, अमेज़न इंडिया
कुल मिलाकर, भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट पर अभी ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट जैसी देसी कंपनियों का दबदबा है। ऐसे में अमेज़न का 'अमेज़न नाउ' के साथ 300 शहरों में उतरना, आने वाले दिनों में एक बड़े कॉम्पिटिशन को जन्म देगा, इसमें कोई शक नहीं है।
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